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  • Friday, 30 October 2026
Rahul Gandhi ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण पर साधा निशाना, कर्मचारियों के साथ खड़े रहने का दिया भरोसा

Rahul Gandhi ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण पर साधा निशाना, कर्मचारियों के साथ खड़े रहने का दिया भरोसा

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया और कर्मचारियों को लिखे एक पत्र के जरिए आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकाल में देश के उद्योगों को मजबूत करने और खड़ा करने के लिए बैंकों की स्थापना की गई थी, जबकि मौजूदा सरकार जनता के पैसे से बनी इन संस्थाओं को बेचने का काम कर रही है। राहुल गांधी ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि वे इस संघर्ष में पूरी तरह उनके साथ खड़े हैं। राहुल गांधी ने याद दिलाया कि पिछले साल संसद भवन में बैंक के कुछ कर्मचारी उनसे मिले थे और उन्होंने सवाल उठाया था कि जिस बैंक को उन्होंने अपनी मेहनत से मुनाफे में पहुंचाया है, सरकार उसे क्यों बेचना चाहती है। उन्होंने यह मुद्दा लोकसभा में भी उठाया था, लेकिन सरकार की ओर से मुनाफे में चल रहे इस सरकारी बैंक को बेचने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। राहुल गांधी के अनुसार, सात साल पहले जो बैंक घाटे में चल रहा था, उसने पिछले साल नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया, जिसका पूरा श्रेय बैंक के कर्मचारियों की कड़ी मेहनत को जाता है।

उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास बैंक की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो निजीकरण के बाद घटकर मात्र 34 प्रतिशत रह जाएगी। उन्होंने वर्ष 2003 का हवाला देते हुए कहा कि उस समय संसद में वादा किया गया था कि आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी हमेशा कम से कम 51 प्रतिशत बनी रहेगी। राहुल गांधी ने आशंका जताई कि बैंक के निजी हाथों में जाने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का प्रावधान खत्म हो जाएगा और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा तथा सेवा शर्तें भी समाप्त हो जाएंगी। दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश के लिए दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। विभाग के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया विनिवेश पर सचिवों के मुख्य समूह द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आयोजित की गई है और इस दौरान रिजर्व प्राइस (न्यूनतम कीमत) में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।

 

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