ऑस्कर की रेस में शामिल हुई Priyanka की वी वर हियर
मुंबई। ग्लोबल अभिनेत्री और फिल्म निर्माता प्रियंका चोपड़ा जोनस के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है।अभिनेत्री द्वारा निर्मित भारतीय शॉर्ट फिल्म वी वर हियर विश्व के सबसे प्रतिष्ठित एकेडमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ में शामिल होने के लिए आधिकारिक रूप से योग्य घोषित हो गई है। अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रियंका ने कहा कि यह फिल्म वर्तमान समय के एक अत्यंत प्रासंगिक और गंभीर विषय को बहुत ही अनोखे, मनोरंजक और नए दृष्टिकोण के साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुत करती है। प्रियंका चोपड़ा जोनस इस बहुचर्चित शॉर्ट फिल्म से कार्यकारी निर्माता के रूप में जुड़ी हुई हैं। यह फिल्म वास्तव में एक मॉक्यूमेंट्री शैली में बनाई गई काल्पनिक वृत्तचित्र कहानी है।
इसकी पटकथा भारत के एक छोटे से शहर में रहने वाले तीन ऐसे बुजुर्ग व्यक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समाज में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के प्रभाव और हस्तक्षेप का विरोध करने का एक अनोखा रास्ता चुनते हैं। एआई की तकनीक को रोकने और उसका विरोध दर्ज कराने के लिए वे तीनों बुजुर्ग खुद विभिन्न घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का रूप धारण कर लेते हैं। यह बेतुका लेकिन विचारणीय विचार फिल्म को काफी मनोरंजक बनाता है। ऑस्कर की रेस में जगह बनाने से पहले इस शॉर्ट फिल्म ने दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में अपनी सफलता का परचम लहराया है। प्रसिद्ध पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल शॉर्टफेस्ट में इस फिल्म ने बेस्ट लाइव-एक्शन शॉर्ट फिल्म और बेस्ट कॉमेडी शॉर्ट जैसे दो बड़े और मुख्य पुरस्कार अपने नाम किए थे। इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों को जीतने के बाद ही इस फिल्म के लिए ऑस्कर की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
जानकारों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और मानव जीवन के संघर्ष को इस तरह के व्यंग्यात्मक रूप में पेश करना ही इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी है। फिल्म के लेखक और निर्देशक प्रणव भसीन का कहना है कि यह फिल्म एक बहुत छोटे और थोड़े पागलपन भरे विचार से शुरू हुई थी कि तीन बुजुर्ग व्यक्ति एआई को रोकना चाहते हैं। हालांकि, काम करते-करते उन्हें इन पात्रों की निश्छल दोस्ती और उनके जिद्दी इरादों से लगाव हो गया। उन्होंने इतने बड़े मंच तक पहुंचने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि प्रियंका चोपड़ा जोनस और एंड्रयू स्कॉट जैसे अनुभवी दिग्गजों का साथ मिलना किसी भी युवा फिल्म निर्माता के लिए एक सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि भारत में कई बार वास्तविक परिस्थितियां किसी काल्पनिक कहानी से भी ज्यादा अजीब होती हैं, इसलिए मॉक्यूमेंट्री फॉर्मेट के जरिए वे असली स्थानों और आम लोगों की संवेदनाओं को फिल्म से जोड़े रख पाए।
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