China में घबराकर खरीद रहे बोरी भरकर नमक
- जापान के एक फैसले से दशहत
बीजिंग। जापान ने अपने फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट में स्टोर लगभग 2 हजार करोड़ लीटर जहरीला पानी प्रशांत महासागर में छोड़ने का ऐलान किया। जापान इस पानी का इस्तेमाल अपने न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के रिएक्टर्स को ठंडा रखने के लिए करता था। चीन और दक्षिण कोरिया को डर है कि इसमें रेडियोएक्टिव विकिरण हो सकते हैं, जिससे रेडिएशन फैल सकता है। चूंकि इसी समुद्र के पानी का इस्तेमाल करके चीन अपने यहां नमक बनाता है, इसलिए नमक को लेकर खतरा और बढ़ गया है।जैसे ही यह खबर लोगों को हुई, उन्हें नमक से रेडिएशन का खतरा नजर आने लगा।इस वजह से वे तुरंत नमक की बोरियां खरीदने बाजार पहुंच गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चाइना साल्ट की ओर से बयान जारी किया गया।
सरकारी कंपनी ने स्वीकार किया कि लोग घबराकर खरीदारी कर रहे हैं, जिसकी वजह से नमक भंडार और स्टोर्स में साल्ट की कमी हो गई है।लेकिन इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।कंपनी ने लोगों से पैनिक होकर खरीदारी न करने को कहा।इसके बावजूद बीजिंग और शंघाई जैसे शहरों में पूरी रात लोग लाइनों में लगकर नमक खरीदते नजर आए।ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है।जापान में साल 2011 में जब भीषण सुनामी आई थी।उस समय फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के तीन रिएक्टर बंद हो गए थे।सुनामी ने रिएक्टर्स के कूलिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचा।और तभी से जापान इन रिएक्टर्स को ठंडा रखने के लिए पानी का इस्तेमाल करने लगा।समुद्र का यह पानी अब तक 10 लाख टन से ज्यादा हो गया है।उस समय भी चीन में डर फैल गया था कि समुद्र के रास्ते विकिरण फैल सकता है।तब भी लोग नमक की जमकर खरीदारी करते नजर आए थे।
जानकारों के मुताबिक, इस पानी में टाइट्रियम के कण मौजूद हो सकते हैं क्योंकि इसे पानी से अलग नहीं किया जा सकता।इसके संपर्क में अगर कोई आ जाए तो उसे कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं।जापान के ऐलान के कुछ ही घंटों में मांग इतनी ज्यादा हो गई कि नमक की कीमतों में 300 फीसदी तक का इजाफा देखा गया।हालात यहां तक आ गई कि सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और बकायदा बयान जारी कर बताना पड़ा कि इसकी वजह क्या है।लोगों को भी सरकार ने समझाया और न घबराने की सलाह दी।
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