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  • Tuesday, 13 January 2026
Faiz-e-Ilahi Mosque को लेकर पाकिस्तान ने अड़ाई टांग, भारत ने दिखाया आईना

Faiz-e-Ilahi Mosque को लेकर पाकिस्तान ने अड़ाई टांग, भारत ने दिखाया आईना

-बीजेपी का विपक्ष पर हमला, कहा- भारत के कुछ लोग और पाकिस्तान एक ही भाषा बोल रहे

इस्लामाबाद। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर भारत के आंतरिक मामलों में टांग अड़ाने की कोशिश की। हालांकि पाकिस्तान को भारत ने आईना दिखा दिया है। दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा की गई, बेबुनियाद टिप्पणियों पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। वहीं बीजेपी ने देश के अंदर सक्रिय विपक्षी गठबंधन को भी निशाने पर लिया। बता दें दिल्ली में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बुलडोजर एक्शन पर मुख्य संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। वह पूरी तरह सुरक्षित है। दिल्ली में की गई हालिया कार्रवाई किसी धार्मिक स्थल के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ थी। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए प्रशासन ने मस्जिद परिसर में अवैध रूप से संचालित बैंक्वेट हॉल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर को हटाया। यह कार्रवाई पूरी तरह से कानून सम्मत थी, लेकिन पाकिस्तान इसे सांप्रदायिक रंग देने की नाकाम कोशिश कर रहा है। मस्जिद मामले पर पाकिस्तानी बयानबाजी के बाद सियासत गरमा गई। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मुद्दे पर विपक्षी इंडिया गठबंधन’ को भी घेरा है। पूनावाला ने आरोप लगाया कि जो झूठ देश के अंदर कुछ विपक्षी नेताओं ने फैलाया, अब उसी झूठ को पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोहरा रहा है। यह देखना विचलित करने वाला है कि भारत के कुछ लोग और पाकिस्तान एक ही भाषा बोल रहे हैं।

कुछ लोगों को देखकर लगता है कि उनके लिए एलओवी का मतलब लीडर ऑफ अपोजिशन नहीं, बल्कि ‘लीडर ऑफ पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा’ है। उन्होंने कहा कि ये लोग इंडी गठबंधन की तरह नहीं, बल्कि ‘रावलपिंडी गठबंधन’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वे भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहर फैलाने के लिए पाकिस्तान को मौका दे रहे हैं। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान जो खुद अपने देश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों के लिए दुनिया भर में बदनाम है, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश इस बात का प्रमाण है कि भारत में कार्रवाई धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान और कानून के आधार पर होती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक जमीन पर किए गए किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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