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Pahalgam हमले के बाद भारत की सख्ती: पहले सिंधु समझौता तोड़ा और अब राजनयिक को बुलाया

Pahalgam हमले के बाद भारत की सख्ती: पहले सिंधु समझौता तोड़ा और अब राजनयिक को बुलाया

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी बढ़ गई है। हमले के दूसरे दिन ही भारत ने सिंधु जल समझौता तोड़ने का भी ऐलान किया और इसके बाद नई दिल्ली ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया है। हालांकि इस आशय की अभी कोई अधिकृत ऐलान नहीं हुआ है लेकिन खबरें इस तरह की आ रहीं हैं। सीसीएस की बैठक के बाद देर शाम विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि एक मई तक राजनयिक संबंधों में और कटौती के माध्यम से पाकिस्तानी और भारतीय उच्चायोगों में तैनात लोगों की कुल संख्या घटाकर 55 से 30 कर दी जाएगी। मिस्री ने बताया कि पाकिस्तानी नागरिकों को दक्षेस वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और एसवीईएस वीजा के तहत भारत में मौजूद किसी भी पाकिस्तानी नागरिक के पास भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे का समय है।उन्होंने कहा कि भारत भी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से अपने रक्षा, नौसेना, वायु सलाहकारों को वापस बुलाएगा। मिस्री ने कहा, संबंधित उच्चायोगों में ये पद निरस्त माने जाएंगे। दोनों उच्चायोगों से सेवा सलाहकारों के पांच सहायक कर्मचारियों को भी वापस बुलाया जाएगा।

मिस्री ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित रहेगी, जब तक कि पाकिस्तान सीमापार आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय रूप से बंद नहीं कर देता। अटारी में एकीकृत सीमा चौकी को बंद करने के बारे में मिस्री ने कहा कि जो लोग वैध प्रमाण-पत्र के साथ सीमा पार गए हैं, वे एक मई से पहले उस मार्ग से लौट सकते हैं।खबरों के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक साद अहमद वराइच को तलब किया है। साथ ही सैन्य राजनयिकों के लिए औपचारिक पर्सोना नॉन ग्रेटा नोट सौंपा है। इसका मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है, जो स्वीकार्य नहीं है या अवांछित है। खास बात है कि भारत सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब दो दिन पहले पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हुई और बुधवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा समिति की बैठक हुई है।

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