मुझे दुख है कि मैंने एआई पर काम क्यों किया, इससे लोगों की नौकरियां जा रहीं हैं: Geoffrey Hinton
न्यूयॉर्क। आर्टिफिशियल इंटेलजेंस के जनक कहे जाने वाले ज्यॉफ्रे हिंटन ने खुद अपनी ही बनाई तकनीक पर चिंता जताई और कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि एआई की वजह से लोगों की नौकरियां जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जीवनभर उन्हें इस बात का अफसोस रहेगा कि उन्होंने एआई के लिए इतने समय तक काम किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इसे कोई रोक नहीं सकता था। अगर मैंने ऐसा ना किया होता तो कोई और कर देता। दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल बेसिक इनकमा का रास्ता इस युग में कारगर हो सकता है। एआई की वजह से जॉब मार्केट में आ रहे बदलाव के दौर में मैं कहना चाहता हूं कि यूनिवर्सल बेसिक इनकम एक अच्छा रास्ता है। एआई से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और खूब पैसा बढ़ेगा लेकिन इससे समाज में असमानता बढञ जाएगी। बहुत सारे लोगों की नौकरियां जाएंगी और दूसरी तरफ बहुत सारे लोग बेहद अमीर हो जाएँगे। यह समाज के लिए बहुत बुरा होने वाला है। उन्होंने कहा कि अगले पांच से 20 साल में ही एआई एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
बता दें कि ज्यॉफ्रे हिंटन का जन्म लंदन में 6 दिसंबर 1947 कोहुआ था। उन्होंने कैंब्रिट से एक्सपेरिमेंटल साइकॉलजी में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में पीएचडी की। वह गूगल के साथ काम कर रहे थे लेकिन अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दरअसल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कोई सीमा नहीं है। यह ऐसी तकनीक है जो कि खुद विकसित होने की क्षमता रखती है। महान वैज्ञानिक स्टीफन्स हॉकिन्स ने एआई को एक बड़ा खतरा बताया था और कहा था कि इंसान का विकास एक सीमित गति से होता है। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कोई सीमा नहीं है। ऐसे में मानव मशीनों से पीछे हो जाएगा और यह पूरी मानवता के लिए खतरा है।
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