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क्रिकेट को वैश्विक खेल बनाना है तो छोटी टीमों को बड़ी टीमों से मुकाबलों का अवसर मिेले : Ashwin

क्रिकेट को वैश्विक खेल बनाना है तो छोटी टीमों को बड़ी टीमों से मुकाबलों का अवसर मिेले : Ashwin

मुम्बई। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय क्रिेकेट परिषद (आईसीसी) क्रिकेट को वैश्विक खेल बनाना है तो उभरती हुई टीमों को नियमित अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने का अवसर मिले। अश्विन के अनुसार हाल में आईसीसी ने जिस प्रकार से टीमों की संख्या बढ़ाई है उसका तब तक फायदा नहीं मिलेगा जब तक कि इन छोटी टीमों को बड़ी टीमों के खिलाफ पर्याप्त अवसर न मिले। आईसीसी ने कुछ समय पहले ही एकदिवसीय विश्व कप और 2028 के टी-20 विश्व कप के प्रारूप में बड़े बदलावों की घोषणा की थी। नए प्रारूप के तहत साल 2027 के एकदिवसीय विश्व कप में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और प्रतियोगिता को तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा।  जिससे मुकाबलों की संख्या और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगी। वहीं, 2028 के टी-20 विश्व कप में भी दूसरे चरण में अधिक टीमों को शामिल करने की योजना है, ताकि टूर्नामेंट और अधिक रोमांचक बन सके।


अश्विन का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के लिहाज से यह कदम सही दिशा में है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, यदि अंतिम लक्ष्य क्रिकेट का वैश्विक विस्तार करना है, तो उभरते देशों के लिए एक मजबूत व्यवस्था तैयार करनी होगी। इस अनुभवी स्पिनर ने सुझाव दिया कि नीदरलैंड, स्कॉटलैंड, नेपाल, अमेरिका और आयरलैंड जैसी टीमों को हर द्विपक्षीय श्रृंखला में तीसरी टीम के रूप में शामिल किया जा सकता है। उनका तर्क है कि इससे इन देशों को केवल क्वालीफाइंग प्रतियोगिताओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि उन्हें शीर्ष स्तर के देशों के खिलाफ नियमित अनुभव मिलेगा।


उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, नेपाल, स्कॉटलैंड और अमेरिका जैसी टीमों ने सीमित अवसरों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। टी-20 विश्व कप जैसे बड़े मंचों पर भी इन टीमों ने कई मजबूत देशों को कड़ी चुनौती देकर अपनी क्षमता साबित की है, जो दर्शाता है कि सही मंच मिलने पर ये टीमें क्रिकेट के स्तर को और ऊंचा उठा सकती हैं। अश्विन ने इस बात पर जोर दिया कि यदि सभी देशों को बराबर अवसर मिलेंगे, तो क्रिकेट का स्तर और लोकप्रियता दोनों बढ़ेंगे। उनका मानना है कि सामूहिक विकास ही इस खेल को ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच पर और अधिक आकर्षक बना सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में क्रिकेट की सफलता केवल भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या अन्य बड़ी टीमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नए देशों को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। 

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