राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर भड़के Mahant, बोले- दोषियों को सीधे फांसी दे दो
अयोध्या। नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में रामलला के चरणों में आने वाले चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और प्रतिष्ठित महंत दिनेंद्र दास महाराज ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने दोषियों के लिए सबसे कड़ी सजा की मांग करते हुए दोटूक शब्दों में कहा कि भगवान के घर में इस तरह का अपराध करने वालों को सीधे फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय अनियमितता को कितना गंभीर अपराध माना जाता है, खासकर एक ऐसे मंदिर में जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। एसआईटी ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि वित्तीय हेरफेर के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके और गबन किए गए धन की रिकवरी की जा सके। एसआईटी की टीम राम मंदिर परिसर में पहुंचकर क्राइम सीन रीक्रिएट कर रही है, जो यह समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है कि चोरी कैसे और किन परिस्थितियों में हुई।
महंत दिनेंद्र दास महाराज ने जांच की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया है और उन्हें भरोसा है कि स्थानीय प्रशासन पूरी ताकत से काम कर रहा है और गबन की गई राशि को पूरी तरह से वसूल लिया जाएगा। उन्होंने कहा, रामलला के यहां जांच चल रही है वो सरकार की देखरेख में हो रही है। जो चोर हैं वो जेल में पहुंच गए हैं। चोरी कम हो या ज्यादा, चोरी तो चोरी है। शासन पूरी तरह जांच कर रहा हैं। चोर अपनेआप जेल में पहुंच जाएगा। जिन्होंने रामलला के यहां ये काम किया है उन्हें फांसी दे देनी चाहिए। इस कथित चोरी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी एक बड़ा भूचाल ला दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने इस घटना को बेहद हैरान करने वाला बताया है और राज्य सरकार के सुरक्षा दावों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने तर्क दिया कि चोरों और माफियाओं को खत्म करने का दावा करने वाली सरकार देश के सबसे हाई-प्रोफाइल मंदिर के चढ़ावे को सुरक्षित रखने में नाकाम रही। यह आरोप सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, खासकर जब मंदिर का उद्घाटन हाल ही में हुआ है और यह लगातार सुर्खियों में है।
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर पलटवार करते हुए, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने मंदिर प्रशासन का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आस्था का एक पवित्र केंद्र है, न कि कोई व्यावसायिक संस्था। शाइना एनसी ने जोर देकर कहा, लोगों ने जो दान दिया है, वह पब्लिक डोमेन में है। किसी भी ट्रस्ट का ऑडिट होता है और वह सबके सामने रहता है। जब चोरी हुई है, तो आप चोरी पर टिप्पणी कीजिए, राम मंदिर के नाम पर सियासत मत कीजिए। उन्होंने पारदर्शिता पर बल देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को राजनीतिक रंग देना अनुचित है। सरकार ने एसआईटी का दायरा बढ़ाते हुए उसे 15 दिन का सेवा विस्तार भी दिया है ताकि इस नेटवर्क में शामिल हर चेहरे को बेनकाब किया जा सके और दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके।
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