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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Jimmy Carter का 9 जनवरी को डीसी में होगा अंतिम संस्कार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Jimmy Carter का 9 जनवरी को डीसी में होगा अंतिम संस्कार

ट्रप ने कहा-कार्टर ने जिन चुनौतियों का सामना किया, वह देश के लिए अहम समय था

वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर का अंतिम संस्कार 9 जनवरी को वाशिंगटन डीसी में किया जाएगा। अंतिम संस्कार का दिन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है। बाइडेन पूर्व राष्ट्रपति कार्टर के लिए एक श्रद्धांजलि भाषण दे सकते हैं। कार्टर के सम्मान में 9 जनवरी को संघीय कार्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की कि शोक दिवस के मौके पर 9 जनवरी को कोर्ट भी बंद रहेगा। कार्टर का रविवार को 100 साल की उम्र में निधन हो गया था। कार्टर को सम्मानित करने वाली सेवाएं 4 जनवरी से शुरू होंगी। इसमें जॉर्जिया में उनके बचपन के घर और पारिवारिक फार्म पर पार्थिव देह ले जाई जाएगी। फिर जॉर्जिया स्टेट कैपिटल में रखा जाएगा। वाशिंगटन, डीसी जाने से पहले, कार्टर का शव 7 जनवरी तक अटलांटा के कार्टर प्रेसिडेंशियल सेंटर में रखा जाएगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर यूएस नेवी मेमोरियल और फिर यूएस कैपिटल ले जाया जाएगा। कैपिटल पहुंचने पर 7 जनवरी को कांग्रेस के सदस्य दिवंगत राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देंगे। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई 9 जनवरी को सुबह 10 बजे नेशनल कैथेड्रल में दी जाएगी। सांसदों ने एक संयुक्त बयान में कह कि राष्ट्र के प्रति राष्ट्रपति कार्टर की लंबी और विशिष्ट सेवा को सम्मानित करते हुए उनके अवशेषों को संयुक्त राज्य कैपिटल के रोटुंडा में रखा जाए ताकि अमेरिकी जनता को भी राष्ट्रपति कार्टर को अंतिम विदाई देने का मौका मिल सके।

रविवार को ट्रुथ सोशल पर अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कार्टर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा- राष्ट्रपति के रूप में जिमी कार्टर ने जिन चुनौतियों का सामना किया, वह हमारे देश के लिए एक अहम समय था और उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कोशिश की। उन्होंने हमेशा अमेरिकियों के लिए काम किया। ट्रंप ने कहा कि इसलिए हम सभी उनके आभारी हैं। कार्टर को 2002 में उनके वैश्विक मानवाधिकार कार्यों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए उनके दशकों तक किए गए कठिन प्रयास भी शामिल थे। कार्टर ने 1982 में अपनी पत्नी के साथ कार्टर सेंटर की स्थापना की और इसके जरिए उन्होंने विकासशील देशों में मानवाधिकारों की बहाली और लोकतांत्रिक संस्थानों के निर्माण पर दशकों तक काम किया।

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