विदेश मंत्रियों की मुलाकात से उम्मीद: India-Canada के संबंध होंगे मजबूत
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नए और ऊंचे स्तर पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों विदेश मंत्रियों ने कूटनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाने और उच्चस्तरीय संपर्कों को व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में ठोस समझौतों में बदलने पर सहमति जताई।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को अच्छी और सार्थक बातचीत बताते हुए कहा कि दोनों देश अपने रिश्तों को एक ऊंचे स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मुलाकात की तस्वीरें और एक छोटा वीडियो भी साझा किया। हालांकि, दोनों पक्षों ने तुरंत बैठक में हुई विशेष चर्चाओं या किसी नए समझौते का खुलासा नहीं किया। यह मुलाकात भारत-कनाडा संबंधों में पिछले एक साल में आए बड़े बदलावों को दर्शाती है, जिसमें पहले घोषित साझा रोडमैप और हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा शामिल है। कार्नी ने इस साल की शुरुआत में मुंबई और नई दिल्ली का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने पर एक व्यापक एजेंडा तय किया था।दोनों नेताओं ने 2026 तक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर बातचीत पूरी करने की प्रतिबद्धता जताई है। कनाडा का मानना है कि इस प्रस्तावित व्यापार समझौते से 2030 तक दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश, कृषि, डिजिटल व्यापार और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।
एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की भी घोषणा की गई है, जिसमें लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी), लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी), यूरेनियम, सौर ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। व्यापार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि 2.6 अरब डॉलर का वह समझौता रही, जिसके तहत कनाडा की कंपनी कैमेको 2027 से 2035 के बीच भारत को परमाणु बिजली उत्पादन के लिए लगभग 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति करेगी। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण खनिजों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष अनुसंधान और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी ने अपनी भारत यात्रा के दौरान भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार व प्रौद्योगिकी में एक बड़ी ताकत बताया था। भारत और कनाडा के रिश्तों में वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की भी बड़ी भूमिका है, जिनकी संख्या 18 लाख से अधिक है। 2024 में, अध्ययन परमिट सहित अधिकांश आप्रवासन श्रेणियों में भारत, कनाडा के लिए सबसे बड़ा स्रोत देश रहा है। कनाडा के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार 10.9 अरब डॉलर था, जबकि 2024 में भारत को कनाडा की सेवाओं का निर्यात 15.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें शिक्षा से जुड़ी यात्राओं की अहम भूमिका थी। दोनों सरकारों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच व्यवस्थित बातचीत भी दोबारा शुरू कर दी है, जिसमें आतंकवाद, साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और आप्रवासन कानूनों के प्रवर्तन जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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