Dark Mode
  • Thursday, 30 April 2026
कलाकारों को केवल मनोरंजन का साधन ना समझे : Kailash Kher

कलाकारों को केवल मनोरंजन का साधन ना समझे : Kailash Kher

मुंबई। हाल ही में सूफी अंदाज में गायन के लिए मशहूर गायक कैलाश खेर ने कहा कि कलाकारों को केवल मनोरंजन का साधन या जोकर नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने इस तरह की मांगों को अनुचित बताया और संगीतकारों की तुलना अन्य क्षेत्रों के सम्मानित पेशेवरों से की, जिससे उनकी बात में और वजन आ गया। कैलाश खेर हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित अवॉर्ड शो के मंच पर अपनी बेबाक राय व्यक्त कर चर्चा में आ गए हैं। जब उनसे समारोह में कुछ पंक्तियाँ गाने की गुजारिश की गई, तो उन्होंने न सिर्फ विनम्रता से इनकार किया, बल्कि आयोजकों और कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों को भी एक महत्वपूर्ण नसीहत दी। अपने शब्दों में जोर देते हुए कैलाश खेर ने कहा, यह वैसा ही है जैसे आप किसी महान क्रिकेटर, जैसे सचिन तेंदुलकर, से कहें कि ज़रा एक छक्का लगाकर दिखा दीजिए? या किसी सैनिक से यह उम्मीद करें कि अपनी पोजीशन लेकर एक गोली चलाकर दिखा दे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की मांगें कलाकारों की गरिमा के खिलाफ हैं। उनकी यह टिप्पणी उनके भीतर की उस ललक और इच्छा को दर्शाती है, जिसके तहत वे गायक और संगीत की छवि को बदलना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि संगीत को केवल दो लाइन गा दीजिए, मूड बना दीजिए वाली सतही सोच से ऊपर उठकर देखा जाए। कैलाश खेर ने भावुक होकर कहा, यह बहुत गलत है। यह रिक्वेस्ट ही मत कीजिए। कलाकार को जोकर मत बनने दीजिए।

साधक को एक मनोरंजनक मत बनाइए। कलाकार साधक होते हैं, वह अपने मन के होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कलाकार अपने कला के प्रति समर्पित होते हैं और उन्हें केवल तात्कालिक मनोरंजन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कैलाश खेर के इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक तरफ जहाँ कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने उनकी बात से सहमति जताई और उनकी प्रतिक्रिया की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने इसकी आलोचना भी की। सहमति जताने वालों ने इसे दमदार जवाब और आखिरकार किसी ने ये बात कही जैसे कैप्शन के साथ साझा किया। उनका मानना था कि कैलाश खेर ने कलाकारों के आत्मसम्मान और उनकी कला के प्रति सम्मान की बात कही है। दूसरी ओर, आलोचकों का तर्क था कि एक कलाकार होने के नाते, यदि उनकी दो पंक्तियाँ गाने से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी बड़े निर्देशक, निर्माता, प्रभावशाली व्यवसायी (जिनकी शादियों में वे गाते हैं), या किसी सुपरस्टार के अनुरोध पर भी वे ऐसे ही इनकार करते। इन टिप्पणियों से यह बहस छिड़ गई कि एक कलाकार की सार्वजनिक भूमिका और उसकी व्यक्तिगत गरिमा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!