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महिला क्रिकेट टीम के प्रति भेदभाव का रवैया अब तक नहीं बदला : Sana Mir

महिला क्रिकेट टीम के प्रति भेदभाव का रवैया अब तक नहीं बदला : Sana Mir

लाहौर। पाकिस्तान  की महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मीर ने कहा है कि खराब प्रदर्शन के बाद जिस प्रकार से महिला क्रिकेटरों को निशाना बनाया जाता है, उससे साफ है कि अभी भी  उनके खिलाफ भेदभाग बरता जा रहा है।  सना के अनुसार क्रिकेट के प्रति दीवानगी के बाद भी  प्रशंसकों और आलोचकों द्वारा पुरुष और महिला टीम को लेकर दोहरा रवैय अपनाया जा रहा है। टी20 विश्वकप में पाक के खराब प्रदर्शन से भी प्रशंसक भड़के थे। पाक टीम ने विश्व कप में लगातार चार हार के बाद नीदरलैंड्स पर एकमात्र जीत की है। इस निराशाजनक प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए, सना ने सवाल किया कि जब पुरुष टीम खराब प्रदर्शन करती है, तो क्या कोई उनसे घर पर ही रहकर काम करने को कहता है। 


इस पूर्व क्रिकेटर  ने कहा कि दोहरा रवैया नहीं चलेगा। खासकर जब पुरुष और महिला टीमों के प्रदर्शन पर चर्चा की जाती है। उन्होंने कहा, मैं आलोचना के इस लहजे से सहमत नहीं हूं। हां, टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी पर केवल इसलिए कि यह महिला टीम है तो उससे भेदभाव  क्यों किया जाये ? उन्होंने दुख जताया कि इतने सालों बाद भी महिला टीम को वह सम्मान नहीं मिल रहा है, जिसकी वे अधिकारी हैं।उन्होंने ने प्रशंसकों और आलोचकों से  कहा कि पेशेसर क्रिकेट अपनाने वाली लड़कियों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उन पर भी ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि लड़कियों की क्षमता साबित करने में कई साल लग गए, और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनके प्रदर्शन को अभी भी उनके लिंग के आधार पर आंका जा रहा है, न कि क्रिकेट कौशल के आधार पर। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सबसे पहले महिला क्रिकेट के प्रति सामाजिक सोच बदलने की जरूरत है। जब तक हम यह सोच नहीं बदलेंगे, हम कहीं नहीं पहुंच पाएंगे, मीर ने स्पष्ट किया।


सना ने सोशल मीडिया पर महिला खिलाड़ियों का मज़ाक उड़ाने और गलत जानकारी फैलाने के लिए  एआई वीडियो के इस्तेमाल की भी कड़ी आलोचना की, जिससे खिलाड़ियों और उनके परिवारों को गहरा दुख पहुंचा। उन्होंने सवाल किया कि जब पुरुष टीम भी अच्छा प्रदर्शन करने में विफल रहती है तो  किसी ने भी खिलाड़ियों के बारे में ऐसी बातें नहीं सुनीं? सना ने यह भी माना है कि महिला क्रिकेट में प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए  अधिक घरेलू टूर्नामेंट आयोजित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह सच है कि खिलाड़ियों को पता है कि टीम में जगह के लिए कोई प्रतिस्पर्धा  नहीं है और इसका असर उनकी सोच और प्रदर्शन पर पड़ता है। 

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