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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में Champat Rai पर कसेगा शिकंजा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में Champat Rai पर कसेगा शिकंजा

अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे की चोरी और जमीन सौदों से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद, विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने हिंदू धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे से लंबी पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया है। दुबे, जो पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी हैं, लगातार राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाते रहे हैं। एसआईटी ने इन आरोपों के संबंध में संतोष दुबे से दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है, जिन्हें वे पेश करेंगे। यह पूछताछ पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर कार्यालय में वर्चुअल माध्यम से करीब आधे घंटे तक चली, जिसमें एसआईटी सदस्य किरण एस ने आरोपों के बारे में सिलसिलेवार सवाल पूछे। इनके बयानों के बाद माना जा रहा है कि चंपत राय पर शिकंजा कसा जा सकता है। संतोष दुबे ने एसआईटी को बताया कि राम मंदिर से चढ़ावे की चोरी लंबे समय से हो रही है, और इस मामले में छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया है, जबकि असल जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने 2002 में 1250 राम शिलाओं की चोरी का भी जिक्र किया और कहा कि उनके पास चढ़ावा चोरी से जुड़ी रकम और अन्य अनियमितताओं का विस्तृत ब्योरा है।

इसके अलावा, दुबे ने ट्रस्ट पर कम कीमत की जमीन को दोगुने से ज्यादा कीमत में खरीदने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने एसआईटी को बताया कि इन सभी आरोपों के समर्थन में उनके पास पुख्ता दस्तावेज सुरक्षित हैं, जिन्हें वे लखनऊ स्थित एसआईटी को भेज देंगे। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे संतोष दुबे ने इस मामले में कई मंचों और मीडिया में खुलकर अपनी बात रखी है और दोषियों को जेल भेजने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अपराधियों को उनके किए की सजा मिलनी चाहिए, भले ही वे उनके कोई सगे संबंधी ही क्यों न हों। दुबे ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनके आरोप गलत साबित होते हैं तो वे किसी भी दंड को भुगतने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि अयोध्यावासियों पर लगे इस कलंक को मिटाना आवश्यक है और इसके लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे। देर शाम बयान दर्ज कराकर निकले संतोष दुबे ने बताया कि एसआईटी ने उनके आरोपों से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं और वे सभी दस्तावेज सोमवार को एसआईटी को उपलब्ध करा देंगे। इस मामले की गहन जांच से अब राम मंदिर से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, और पूर्व महासचिव चंपत राय समेत अन्य पदाधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की आशंका जताई जा रही है।

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