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कोर्ट ने Rhea के बैंक अकाउंट अनफ्रीज करने दिए आदेश

कोर्ट ने Rhea के बैंक अकाउंट अनफ्रीज करने दिए आदेश

मुंबई। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) स्पेशल कोर्ट ने एक अहम फैसले में रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक चक्रवर्ती और उनकी मां संध्या चक्रवर्ती के बैंक खातों को अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स केस में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। इस महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश के बाद अब चक्रवर्ती परिवार को आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में मौजूद अपने बैंक अकाउंट्स का एक्सेस फिर से मिल जाएगा, जिससे उन्हें पिछले कई सालों से लगी वित्तीय रोक से मुक्ति मिलेगी। यह आदेश 25 अप्रैल 2026 को सुनाया गया, और इसका आधार यह था कि जांच एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया था। अदालत ने अपने आदेश में पाया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत जो प्रक्रिया निर्धारित की गई है, उसका एनसीबी द्वारा पालन नहीं किया गया। इस कानून के मुताबिक, किसी भी संपत्ति या बैंक खाते को फ्रीज करने के बाद 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी से उसकी मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। हालांकि, इस विशिष्ट मामले में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक मंजूरी प्राप्त नहीं की थी, जिसके कारण कोर्ट ने फ्रीजिंग आदेशों को कानूनी रूप से अमान्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि जब तय समयसीमा के अंदर जरूरी मंजूरी नहीं ली जाती, तो ऐसे फ्रीजिंग आदेश कानूनी रूप से मान्य नहीं रह जाते और उन्हें निरस्त करना पड़ता है।

पूरे मामले की जड़ें साल 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की दुखद मौत के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ी हैं। उस समय जांच के दौरान एक ड्रग्स एंगल सामने आया था, जिसमें रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक का नाम जोड़ा गया था। इसके बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने जांच के हिस्से के रूप में उनके बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया था। एजेंसी का कहना था कि जांच की निष्पक्षता और सबूतों की अखंडता बनाए रखने के लिए वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाना आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या सबूतों को प्रभावित होने से रोका जा सके। हालांकि, इस कार्रवाई के खिलाफ रिया चक्रवर्ती की ओर से लगातार कानूनी चुनौती दी गई। उनका कहना था कि बैंक अकाउंट्स को फ्रीज करने में जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और यह कदम बिना उचित मंजूरी के उठाया गया था। यह मामला कई सालों से अदालत में लंबित था, जहां अब कोर्ट ने अंततः स्पष्ट रूप से कहा कि प्रक्रिया में खामी होने के कारण यह कार्रवाई बेअसर है और इसलिए बैंक खातों को अनफ्रीज करने का आदेश दिया गया है।

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