अज्ञात हमले के बाद America ने रोके सैन्य ऑपरेशन
होर्मुज में तनाव के चलते समुद्री सुरक्षा पर संकट
वाशिंगटन। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बेहद विस्फोटक हो गए हैं। जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच मंगलवार को एक और कार्गो जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हथियार) से निशाना बनाया गया। इस ताजा हमले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ऑपरेशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को तत्काल प्रभाव से रोकने का ऐलान किया है। यह वही ऑपरेशन था जिसके तहत अमेरिका ने जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकालने का जिम्मा लिया था। इसके साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरान के विरुद्ध चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ को भी बंद करने की घोषणा की है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि जहाज पर किसी अज्ञात दिशा से प्रहार किया गया। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है और जिस जहाज को निशाना बनाया गया, वह किस देश का था। जहाज पर सवार चालक दल की स्थिति और पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इससे पहले सोमवार को स्थिति तब और बिगड़ गई थी जब ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत होर्मुज से गुजर रहे दो अमेरिकी वाणिज्यिक जहाजों पर सीधे हमले किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से इन जहाजों पर मिसाइलों, ड्रोनों और हथियारबंद छोटी नौकाओं के जरिए प्रहार किया गया। पहली बार इन जहाजों पर सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य सुरक्षा टीमें तैनात थीं।
पेंटागन ने दावा किया है कि उनकी युद्धपोतों और विमानों की सुरक्षा परतों ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया और हमलावर नौकाओं को नष्ट कर दिया। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र में सीजफायर लागू होने की बातों के बावजूद हमले थम नहीं रहे हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, युद्धविराम की घोषणा के बाद से अब तक सैन्य और वाणिज्यिक जहाजों को करीब 19 बार निशाना बनाया जा चुका है। इसके अलावा दो कंटेनर जहाजों को जब्त किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिका ने अपने ऑपरेशंस को रक्षात्मक बताया था, लेकिन लगातार होती हिंसा और बढ़ते जोखिम के कारण फिलहाल कूटनीतिक और सैन्य रणनीति को बदलने का निर्णय लिया गया है। इस तनावपूर्ण स्थिति ने वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार जगत में भारी चिंता पैदा कर दी है।
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