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6.7 करोड़ साल पुराना Dinosaur  का कंकाल 430 करोड़ में हुआ नीलाम

6.7 करोड़ साल पुराना Dinosaur का कंकाल 430 करोड़ में हुआ नीलाम

 इस कंकाल से धरती पर जीवन के रहस्य को सुलझाने में मिलेगी मदद?
वाशिंगटन। डायनासोर भले ही करोड़ों साल पहले धरती से विलुप्त हो गए हों, लेकिन आज भी उनके जीवाश्म दुनिया के सबसे कीमती वैज्ञानिक खजानों में गिने जाते हैं। अमेरिका में करीब 6.7 करोड़ साल पुराने एक डायनासोर के कंकाल की नीलामी रिकॉर्ड 5.01 करोड़ डॉलर यानी करीब 430 करोड़ रुपए में हुई। इसके साथ ही यह दुनिया का अब तक का सबसे महंगा जीवाश्म बन गया, लेकिन सवाल यह है कि इसमें ऐसी क्या खास बात है कि किसी खरीदार ने इसके लिए सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च कर दिए?


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नीलाम हुआ यह कंकाल खतरनाक डायनासोर टायरैनोसॉरस रेक्स यानी टी-रेक्स का है। टी-रेक्स करीब 6.7 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर मौजूद था। इसे डायनासोरों का सबसे ताकतवर शिकारी माना जाता है। इसकी लंबाई करीब 38 फीट और ऊंचाई 12.5 फीट तक होती थी। इसके जबड़े में बड़े और बेहद मजबूत दांत होते थे, जिनकी मदद से यह अपने शिकार की हड्डियां तक तोड़ सकता था। अब सवाल यह है कि क्या इस कंकाल से धरती पर जीवन के रहस्य को सुलझाने में वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिलेगी?
रिपोर्ट के मुताबिक इस कंकाल का नाम ‘गस’ रखा गया है। इसे अमेरिका के साउथ डकोटा राज्य के हार्डिंग काउंटी में खोजा गया था। यह इलाका हेल क्रीक फॉर्मेशन का हिस्सा है, जिसे दुनिया में डायनासोर के जीवाश्म मिलने वाली सबसे महत्वपूर्ण जगहों में गिना जाता है. इसी क्षेत्र में 1902 में टी-रेक्स के शुरुआती जीवाश्म मिले थे, जिनके आधार पर इस प्रजाति की पहचान हुई थी.


आखिर इतनी बड़ी कीमत क्यों मिली?
सवाल यही है कि आखिर एक कंकाल की कीमत 430 करोड़ रुपए कैसे हो सकती है? दरअसल, ‘गस’ दुनिया में मिले सबसे संपूर्ण टी-रेक्स जीवाश्मों में से एक है। इसमें कुल 183 हड्डियां हैं। हड्डियों की संख्या के हिसाब से यह करीब 61 फीसदी और कुल द्रव्यमान के हिसाब से 75 से 80 फीसदी तक सुरक्षित है। इसका सिर भी करीब 82 फीसदी मूल हड्डियों के साथ संरक्षित है। सबसे खास बात यह है कि इसमें विशबोन, पूरा पेल्विस और दोनों पैर सुरक्षित मिले हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनिया में बहुत कम टी-रेक्स जीवाश्मों में दोनों पैर इतनी अच्छी स्थिति में मिले हैं। इसके शरीर पर काटने के निशान मिले हैं। कई हड्डियों में पुराने फ्रैक्चर के सबूत भी मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह टी-रेक्स अपने जीवन में किसी बड़े संघर्ष या लड़ाई का शिकार हुआ था, लेकिन वह उससे बच निकला था। ऐसी जानकारी वैज्ञानिकों को करोड़ों साल पहले के जीवों के व्यवहार और जीवनशैली को समझने में मदद करती है।


इतनी बड़ी कीमत मिलने के बावजूद वैज्ञानिकों का एक वर्ग इस नीलामी से खुश नहीं है। जीवाश्म वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ऐसे दुर्लभ जीवाश्म किसी निजी कलेक्टर के पास चले जाते हैं, तो उन पर भविष्य में वैज्ञानिक शोध करना मुश्किल हो जाता है। टी-रेक्स को धरती पर रहने वाले सबसे खतरनाक मांसाहारी जीवों में गिना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह करीब 6.6 से 6.8 करोड़ साल पहले उत्तरी अमेरिका में रहता था और करीब 6.6 करोड़ साल पहले एक विशाल क्षुद्रग्रह के पृथ्वी से टकराने के बाद डायनासोरों के साथ विलुप्त हो गया। आज भी टी-रेक्स के जीवाश्म विज्ञान, इतिहास और संग्रहकर्ताओं तीनों के लिए बेहद मूल्यवान हैं। यही वजह है कि करोड़ों साल पुराना इस कंकाल ने सिर्फ नीलामी में नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि एक बार फिर दुनिया का ध्यान डायनासोरों की रहस्यमयी दुनिया की ओर खींचा है।

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