ट्रंप के रुसी डीजल निर्यात के फैसले को Zelenskyy ने बताया अनुचित
- जेलेंस्की और ट्रंप के बीच मतभेद केवल रूसी ईंधन तक सीमित नहीं
कीव। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसलों ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर वॉशिंगटन की नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के लिए स्थिति और असहज हो गई है। ट्रंप एक तरफ पुतिन से बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूसी डीजल निर्यात को अनुमति देकर कुछ प्रतिबंधों में छूट देकर और जेलेंस्की की आलोचना करके तनाव बढ़ा रहे हैं। 9 अक्टूबर को पुतिन के साथ 90 मिनट की फोन कॉल के बाद ट्रंप ने रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने वाले समझौते की घोषणा की, जिसके तहत रूस को अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में लाखों मीट्रिक टन डीजल भेजना था। इस समझौते से रूसी ईंधन पर कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में भी राहत दी गई, जिसे ट्रंप प्रशासन ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने का एक तरीका बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने इस फैसले को अनुचित बताया है, क्योंकि इससे रूस की कमाई बढ़ सकती है जिसका इस्तेमाल युद्ध जारी रखने के लिए किया जा सकता है। उनकी चिंता है कि डीजल के बाद गैस और अन्य क्षेत्रों में भी व्यापारिक समझौते हो सकते हैं, जिससे प्रतिबंधों में व्यापक ढील का रास्ता खुल जाएगा। ट्रंप के इस रुख के पीछे अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म इलेक्शन और घरेलू आर्थिक दबाव को कम करने की चुनौती है। वे यूक्रेन मसले से ध्यान हटाकर चुनाव पर केंद्रित हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत और चीन जैसे रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों के लिए यह स्थिति फायदेमंद है, क्योंकि रूसी ईंधन पर 100 फीसदी टैरिफ की लटक रही तलवार टल गई है, जिससे उन्हें आंशिक तौर पर राहत मिलेगी। ट्रंप और जेलेंस्की के बीच मतभेद केवल रूसी ईंधन तक सीमित नहीं हैं, अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोके, जबकि जेलेंस्की का आरोप है कि रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रखे, जिसके चलते उन्होंने भी हमले किए। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि पुतिन, जेलेंस्की के मुकाबले शांति समझौते के लिए ज्यादा इच्छुक दिखते हैं, जिससे यूक्रेन को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराने का दबाव बन सकता है।
यूक्रेन ने अमेरिकी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा पर गति संबंधी पाबंदियों का मुद्दा भी यूरोपीय नेताओं के सामने उठाया, जिससे उसकी सैन्य गतिविधियों पर असर पड़ा है। जेलेंस्की अब यूरोपीय संघ से ज्यादा आर्थिक और सैन्य समर्थन की तलाश में हैं, क्योंकि ट्रंप की प्राथमिकता अमेरिकी आर्थिक हितों और रूस के साथ संभावित समझौते को आगे बढ़ाना लग रही है, न कि यूक्रेन को बिना शर्त समर्थन देना।
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