US President Trump ने क्यूबा के खिलाफ घोषित की नेशनल इमरजेंसी
वाशिंगटन। वेनेजुएला के निकोलस मादुरो शासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब एक और दक्षिण अमेरिकी देश क्यूबा पर शिकंजा कस दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यूबा के खिलाफ नेशनल इमरजेंसी (राष्ट्रीय आपातकाल) घोषित करते हुए एक नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए एक गंभीर और असामान्य खतरा बताया गया है। इस नए कार्यकारी आदेश का सबसे शक्तिशाली हथियार टैरिफ यानी आयात शुल्क को बनाया गया है। आदेश के तहत, अमेरिका अब उन सभी देशों पर भारी अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है जो क्यूबा को तेल या ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि यह नियम उन देशों पर भी लागू होगा जो किसी तीसरे देश के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से क्यूबा को ईंधन भेज रहे हैं। अमेरिकी वाणिज्य और वित्त मंत्रालय को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि वे ऐसे देशों की पहचान कर उनके उत्पादों पर दंडात्मक आयात शुल्क लागू करें। अमेरिकी प्रशासन की यह कार्रवाई वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद आई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि वेनेजुएला में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद अब क्यूबा को वहां से मिलने वाली तेल और आर्थिक सहायता पूरी तरह बंद हो गई है। व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट में स्पष्ट किया गया कि ट्रंप प्रशासन पहले भी ईरान के परमाणु ढांचे पर हमले और मादुरो को सत्ता से हटाने जैसे कड़े कदम उठा चुका है, और क्यूबा पर यह कार्रवाई इसी कड़ी का हिस्सा है।
अमेरिका की इस कड़ी नाराजगी के पीछे कई सुरक्षा कारण बताए जा रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार हिज्बुल्लाह और हमास जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों को अपने यहां सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करा रही है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि क्यूबा ने अपने क्षेत्र में रूसी खुफिया ठिकानों को जगह दी है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगा सकते हैं। व्हाइट हाउस ने क्यूबा में मानवाधिकारों के हनन, प्रेस की आजादी पर पाबंदी और राजनीतिक विरोधियों के दमन को भी इस आपातकाल का आधार बनाया है। अमेरिका का मानना है कि जब तक क्यूबा में लोकतांत्रिक सुधार नहीं होते और वह शत्रुतापूर्ण ताकतों को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक उस पर आर्थिक दबाव बना रहना आवश्यक है। इस आदेश के बाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उन देशों की चिंता बढ़ गई है जिनके क्यूबा के साथ ऊर्जा व्यापारिक संबंध हैं।
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