Trump का प्रस्ताव: खाड़ी संकट में होर्मुज मार्ग के लिए बनेगी महा-डील?
वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी भीषण जंग और गहराते वैश्विक तेल संकट के बीच एक अप्रत्याशित कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अब तक ईरान के शांति प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर रहे थे, उन्होंने तेहरान को अपना एक बेहद अहम और औपचारिक शांति प्रस्ताव भेजा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह प्रस्ताव सीधे राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को सौंपा है, जिसकी पुष्टि ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने भी की है। कूटनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे कोई महा-डील पक रही है, और क्या दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर खुलेगा?
यह प्रस्ताव ट्रंप द्वारा ईरान के पिछले शांति प्रस्ताव को ठुकराए जाने के कुछ ही दिनों बाद आया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कतर के गुप्त कूटनीतिक रास्तों के जरिए यह अमेरिकी ड्राफ्ट तेहरान तक पहुंचाया गया है। प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने बताया कि विदेश मंत्री अराघची ने कैबिनेट बैठक में राष्ट्रपति पेजेशकियान के सामने यह औपचारिक प्रस्ताव रखा। जानकारों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे तेल संकट और खाड़ी देशों के बढ़ते दबाव ने अमेरिका को अपने कड़े तेवर ढीले करने पर मजबूर किया है। अमेरिका से यह प्रस्ताव मिलने से ठीक पहले तक ईरान के तेवर बेहद सख्त और आक्रामक थे। ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका और उसके सहयोगी खाड़ी देशों को एक खुले अल्टीमेटम में कहा था कि जिस इलाके में हम अपना तेल नहीं बेच सकते, वहां से कोई और देश भी तेल नहीं बेच पाएगा। हमारी सुरक्षा की गारंटी न मिलने पर इस पूरे इलाके में किसी भी देश का इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं रहेगा। गालिबाफ की इस खुली धमकी ने अमेरिका और यूरोप को चिंतित कर दिया, जिसके बाद अमेरिका ने तुरंत अपना प्रस्ताव तैयार कर तेहरान भेजा।
इस कूटनीतिक जंग की धुरी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। फरवरी अंत में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की पूर्ण नाकाबंदी कर दी थी। होर्मुज का रास्ता बंद होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था की सांसें फूलने लगी हैं, क्योंकि जंग शुरू होने से पहले यह मार्ग वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से का स्रोत था, जिस पर सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और इराक जैसे बड़े उत्पादक देश निर्भर हैं। ईरान ने होर्मुज को बंद किया तो दूसरी तरफ अमेरिकी नेवी ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी ताकि ईरान एक बूंद तेल बाहर न बेच सके। दोनों देशों की इस सीधी भिड़ंत ने वैश्विक तेल संकट गहराया और अमेरिका पर कूटनीतिक समाधान का भारी दबाव बनाया।
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