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  • Saturday, 21 February 2026
Trump ने ईरान को दी 10 दिन वाली चेतावनी, बोले– डील नहीं हुई तो ‘कुछ बड़ा’ होगा

Trump ने ईरान को दी 10 दिन वाली चेतावनी, बोले– डील नहीं हुई तो ‘कुछ बड़ा’ होगा

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगले 10 दिनों में कोई सार्थक समझौता नहीं हुआ तो हालात गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि डील न होने की स्थिति में बुरी चीजें होंगी और अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बयान वॉशिंगटन में आयोजित बोर्ड ऑफ पीस कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी है और अब तक की वार्ता “रचनात्मक” रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इतिहास बताता है कि ईरान के साथ एक ठोस और प्रभावी समझौता करना आसान नहीं है। अमेरिकी वार्ताकारों का जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, उनकी बैठकों का माहौल सकारात्मक रहा है, लेकिन अंतिम सहमति तक पहुंचना अभी बाकी है। उन्होंने कहा, शायद हम समझौता कर लें, शायद नहीं। आपको अगले लगभग 10 दिनों में पता चल जाएगा। बढ़ता तनाव और सैन्य तैयारियां ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। विमानवाहक पोत, लड़ाकू जेट और अतिरिक्त रक्षा प्रणालियां क्षेत्र में तैनात की गई हैं। वहीं सैटेलाइट तस्वीरों में संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत कर रहा है। हालांकि तेहरान लगातार इनकार करता रहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित कर रहा है। 2015 परमाणु समझौते की पृष्ठभूमि गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था। यह समझौता औपचारिक रूप से जेसीपीओए के नाम से जाना जाता है। ट्रंप का कहना था कि यह समझौता कमजोर और अपर्याप्त है। बाद में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में इस समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई अंतिम परिणाम नहीं निकला। हाल ही में जेनेवा में हुई वार्ता को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया, हालांकि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कई बड़े मतभेद अब भी कायम हैं।

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