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  • Tuesday, 15 September 2026
2027 विश्वकप में जीत के लिए अभी से तैयारियों में बदलाव की जरुरत : Gavaskar

2027 विश्वकप में जीत के लिए अभी से तैयारियों में बदलाव की जरुरत : Gavaskar

मुम्बई। भारतीय क्रिकेट टीम के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 2027 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले एकदिवसीय विश्वकप में जीत हासिल करने के लिए टीम इंडिया को अभी से अपनी तैयारियों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने की सलाह दी है। गावस्कर का मानना है कि इन बदलावों को समय रहते लागू करना भारतीय टीम के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।गावस्कर ने विशेष रूप से भारतीय बल्लेबाजों को बड़ी बाउंड्री वाले मैदानों पर खेलने की आदत डालने पर जोर दिया। उनका तर्क है कि मेजबान देशों में अक्सर बड़े मैदान होते हैं, और भारतीय बल्लेबाजों को अभी से इसका अभ्यास करना होगा। इसके लिए उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) को घरेलू क्रिकेट में बाउंड्री का आकार बढ़ाने का सुझाव दिया है। गावस्कर के अनुसार, नए घरेलू सत्र की शुरुआत के साथ ही यह बदलाव लागू कर देना चाहिए, ताकि बल्लेबाज अगले साल तक बड़े मैदानों में बाउंड्री लगाने के आदी हो सकें। उन्होंने लिखा, नया सत्र शुरू होते ही बाउंड्री का आकार बढ़ाना बेहद जरूरी है, जिससे हमारे बल्लेबाज अगले साल होने वाले विश्व कप से पहले इसकी आदत डाल सकें।


केवल बड़े शॉट लगाने से सफलता नहीं मिलती, गावस्कर ने एकदिवसीय क्रिकेट में बल्लेबाजों को मैच के हालात के अनुसार खेलने की अहमियत समझाई। उन्होंने सलाह दी कि बल्लेबाजों को यह समझना होगा कि किन गेंदबाजों के खिलाफ अनावश्यक जोखिम मोल नहीं लेना है और किन गेंदबाजों पर खुलकर शॉट खेले जा सकते हैं। उनका तर्क है कि किसी भी टीम के पास सभी पांच विश्वस्तरीय गेंदबाज नहीं होते, इसलिए हर मैच में रन बनाने के मौके हमेशा मिलते हैं, बस उन्हें पहचानने की जरूरत है। गावस्कर ने शॉट चयन को लेकर भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों को अपनी छवि या अहंकार के दबाव में आकर हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। शॉट चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है, उन्होंने कहा, बल्लेबाज को अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना चाहिए और हर गेंद को उसकी गुणवत्ता के अनुसार खेलना चाहिए। उन्होंने टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट के बीच के अंतर को भी रेखांकित किया। जहां टी20 में शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की आवश्यकता होती है, वहीं एकदिवसीय प्रारूप में बल्लेबाजों के पास पिच और परिस्थितियों को समझने, अपनी पारी को संवारने और फिर बड़े शॉट खेलने के लिए पर्याप्त समय होता है।

 

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