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पदार्पण टेस्ट ही Robin Singh के करियर का अंतिम मैच बना

पदार्पण टेस्ट ही Robin Singh के करियर का अंतिम मैच बना

मुम्बई। भारतीय क्रिकेट में कई क्रिकेटर ऐसे हुए हैं जिनका एकदिवसीय क्रिकेट में तो रिकार्ड अच्छा रहा है पर उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलने का अधिक अवसर नहीं मिल पाया। ऐसे ही एक क्रिकेटर हैं ऑलराउंडर रॉबिन सिंह। रॉबिन अपनी अच्छी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे, इसके बाद भी वह बदकिस्मती से केवल एक टेस्ट मैच ही खेल पाये। रॉबिन सिंह ने अपन पदार्पण टेस्ट अक्टूबर 1998 में जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में खेला। इस मैच के बाद रॉबिन को फिर कभी भारतीय टीम के लिए टेस्ट प्रारुप में खेलने का मौका नहीं मिल सका, जिससे उनका टेस्ट करियर एक मैच का होकर ही सिमट गया।
रॉबिन ने हालांकि दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय में अच्छा प्रदर्शन किया था। साल 1989 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने एकदिवसीय डेब्यू किया था। इस क्रिकेटर ने भारतीय टीम के लिए कुल 136 एकदिवसीय मैच खेलते हुए 74.30 के स्ट्राइक रेट से 2336 रन बनाए। इसमें उनके नाम एक शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं। वह अक्सर निचले क्रम में आकर तेजी से रन बनाने और टीम को कठिन परिस्थितियों से निकालने में माहिर थे। बल्लेबाजी के साथ-साथ ही रॉबिन सिंह अपनी मध्यम तेज गति की गेंदबाजी के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने एकदिवसीय में 69 विकेट भी लिए हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 22 रन देकर 5 विकेट रहा। इस ऑलराउंडर ने भारतीय टीम के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, उन्होंने कोच के तौर पर काम किया। रॉबिन भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक बन गए, जिनके टेस्ट करियर की शुरुआत ही उसका अंत साबित हुई हालांकि एकदिवसीय में उन्होंने अपने प्रदर्शन से अंतर पैदा किया।

 

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