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  • Saturday, 14 March 2026
सुरीले सुरों से माधव संगीत महाविद्यालय में सजी Tansen Samaroh की पूर्वरंग सभा

सुरीले सुरों से माधव संगीत महाविद्यालय में सजी Tansen Samaroh की पूर्वरंग सभा

ग्वालियर/ संगीत की नगरी ग्वालियर में 101वें तानसेन संगीत समारोह के अंतर्गत बुधवार की सांध्यबेला में माधव संगीत महाविद्यालय में द्वितीय पूर्वरंग सभा शास्त्रीय संगीत की मोहक धुनों से सरोबार रही। भारतीय संगीत की परंपरा, नाद की महिमा और रागों की अद्भुत रस-धारा ने कार्यक्रम को सुर-श्रृंगार का अनुपम रूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती जी पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण से हुआ। इस पावन अवसर पर माधव संगीत महाविद्यालय की प्राचार्या श्रीमती वीणा जोशी, गंगा दास शाला के महंत रामसेवक दास एवं ध्रुपद केंद्र के गुरु श्री अभिजीत सुखदाणे विशेष रूप से उपस्थित रहे। संचालन अनिकेत तारलेकर और साक्षी कुलश्रेष्ठ ने सौम्य एवं संयत शैली में किया।

सुरों की प्रथम रश्मि : सुदीप भदौरिया का ध्रुपद गायन

कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति में सुदीप भदौरिया ने राग जोग के गंभीर, माधुर्यपूर्ण आलाप से वातावरण को ध्यानमय कर दिया। आलाप (मध्य और द्रुत लय) की मनोहारी विस्तार से उन्होंने ध्रुपद की पारंपरिक गरिमा को उजागर किया। इसके बाद धमार की सुप्रसिद्ध रचना “आज ब्रजराज होरी खेलत वृंदावन में” प्रस्तुत कर कृष्ण भक्ति की अनुभूति कराई। उन्होंने अंतिम प्रस्तुति में ताल तीव्रा की बंदिश “नाद भेद सो न्यारो” ने नादयोग की गूढ़ता को अभिव्यक्त किया। उनके साथ पखावज पर श्री जगत नारायण शर्मा की दमदार संगत और तानपूरे पर युक्ता तोमर एवं साकेत कुमार का संतुलित निनाद वातावरण में पवित्रता भरता रहा।

वायलिन का सुर-संवाद : अंकुर धारकर की प्रस्तुति

दूसरी प्रस्तुति में अंकुर धारकर ने वायलिन वादन के माध्यम से राग बिहाग की कोमल, श्रृंगारिक और कोमल भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने आलाप से राग का रूप उजागर किया फिर विलंबित एकताल और मध्यलय तीनताल में गत प्रस्तुति से मन को मोह लेने वाला सुर-संवाद रचा। उनके साथ तबले पर विनय बिंदे की लयकारी ने वादन को और अधिक निखारा।

संस्कृति, विरासत और सुरों का वैश्विक उत्सव

मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन, नगर निगम ग्वालियर तथा पर्यटन विभाग के सहयोग से उस्ताद अलाउद्दीन ख़ाँ संगीत एवं कला अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के तत्वावधान में आयोजित यह विश्वप्रसिद्ध तानसेन समारोह भारतीय संगीत की गौरवमयी परंपरा का अद्वितीय उत्सव है।

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