Saina Nehwal ने संन्यास लिया
नई दिल्ली। अनुभवी बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने खेल से संन्यास ले लिया है। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साइन ने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि अब उनकी फिटनेस पहले जैसी नहीं रही है। इसी कारण वह प्रतिस्पर्धी खेलों में अब नहीं उतरेंगी। साइना ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने अंतिम बार कोई मुकाबला साल 2023 में सिंगापुर ओपन में खेला था। वह गत ढाई-तीन साल से पेशेवर बैडमिंटन से दूर रही हैं। उनके घुटने में भी समस्या है। इस कारण वह काफी समय से खेल से दूर चल रहीं थीं। उनकी उम्र भी 35 के करीब पहुंच रही है जिससे भी उनके खेल पर प्रभाव पड़ा है। उन्हें अपने योगदान के कारण अर्जुन पुरस्कार (2009), मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2010), पद्म श्री (2010) और पद्म भूषण (2016) जैसे अवार्ड मिले हैं। साइना ने पिछले कुछ समय से बैडमिंटन नहीं खेला है और उसके बाद से ही उनके संन्यास की अटकलें लगायी जा रहीं थीं। साइना ने कहा, ‘‘मैंने दो साल पहले ही खेलना छोड़ दिया था मैंने अपनी अनुसार ही खेला और अब संन्यास की घोषणा की है। साथ ही कहा कि अगर आप और खेलने में सक्षम नहीं हैं तो खेल में बने रहने का मतलब नहीं है।’’ नेहवाल ने कहा कि यह फैसला उन्होंने घुटने की गंभीर समस्या से लिया, जिसकी वजह से लगातार उच्च दबाव वाली ट्रेनिंग कठिन हो गयी थी।
नेहवाल ने कहा, “ उनका घुटना दर्द कर रहा है। कार्टिलेज पूरी तरह से खराब हो गया है, इसके अलावा उन्हें जोड़ो की बिमारी है, यह बात मेरे माता-पिता को पता होनी चाहिए थी, मेरे कोच को यह जानना जरूरी था और मैंने बस उनसे कहा, ‘अब शायद मैं यह और नहीं खेल पाऊंगी, यह कठिन है।” संन्यास की घोषणा पर साइना ने कहा, लोगों को धीरे-धीरे पता चल ही रहा था कि साइना नहीं खेल रही है। घुटने की चोट को लेकर साइना ने कहा, खेल में शीर्ष पर आने आठ से नौ घंटे ट्रेनिंग की जरुरी होती है पर अब मेरा घुटना एक या दो घंटे में ही दर्द करने लगा था। गौरतलब है कि बैडमिंटन में ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाली साइना पहली भारतीय खिलाड़ी थीं। इसके अलावा वह साल 2015 में विश्व रैंकिंग में नंबर 1 खिलाड़ी भी रही थीं। बीडब्ल्यूएफ विश्व जूनियर चैंपियनशिप 2008 में उन्होंने जीत हासिल की जबकि सुपर सीरीज खिताब 2009 इंडोनेशिया ओपन 2009 उन्होंने जीत हासिल की। 2010 और 2018 राष्ट्रमण्डल खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक भी जीता है। वह इन खेलों में दो एकल स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
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