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  • Saturday, 05 September 2026
Cancer और दुर्लभ बीमारी की दवाओं पर सीमा शुल्क हटाने से मरीजों को राहत

Cancer और दुर्लभ बीमारी की दवाओं पर सीमा शुल्क हटाने से मरीजों को राहत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कैंसर की 17 महंगी दवाओं और सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज पर 5–10 फीसदी आयात शुल्क तुरंत हटाने का निर्णय लिया है। इसका मकसद मरीजों के लिए इन उपचारों को सुलभ बनाना और लागत को कम करना है। इस कदम से वैश्विक और घरेलू दवा कंपनियों को भी फायदा होगा, जिनके पोर्टफोलियो में आयातित दवाएं शामिल हैं। इस छूट से नोवार्टिस, इलाई लिली, एस्ट्राजेनेका, रोश जैसी कंपनियां लाभान्वित होंगी। उदाहरण के लिए, नोवार्टिस का रिबोसिस्लिब और इलाई लिली का एबेमासिस्लिब ब्रेस्ट कैंसर में उपयोग होता है। एस्ट्राजेनेका का ट्रेमेलिमुमैब लिवर कैंसर और रोश की वेनेटोक्लाक्स क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया के इलाज में प्रयोग होती हैं। इसके अलावा, ऐबवी, ब्लूप्रिंट मेडिसिन्स, बेयर और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब जैसी कंपनियों की आयातित इम्यूनोथेरेपी भी लाभ में रहेंगी। एल्नीलम फार्मास्युटिकल्स को प्राइमरी हाइपरोक्सालुरिया टाइप 1 के लिए लुमासिरेन पर छूट मिलेगी।

इसके अलावा, हेरेडिटरी एंजियोएडेमा और प्राइमरी इम्यूनोडिफिशिएंसी डिसऑर्डर (पीआईडीडी) के इलाज में दवा आपूर्तिकर्ताओं को स्थिर मांग और बेहतर किफायत मिलेगी। मरीजों के लिए इसका सीधा फायदा यह होगा कि महंगी दवाओं की लागत में थोड़ी कमी आएगी। लंबे समय तक इस्तेमाल होने वाले ब्रेस्ट कैंसर की दवाओं जैसे रिबोसिस्लिब और एबेमासिस्लिब की कीमतें कम होने से इलाज जारी रखना आसान होगा। ट्रेमेलिमुमैब जैसी इम्यूनोथेरेपी भी अधिक सुलभ हो जाएगी।

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