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  • Tuesday, 20 October 2026
पुतिन ने दिया ट्रंप-जिनपिंग के साथ बैठक का प्रस्ताव, Zelenskyy को नहीं बुलाया

पुतिन ने दिया ट्रंप-जिनपिंग के साथ बैठक का प्रस्ताव, Zelenskyy को नहीं बुलाया

  • यह बैठक 18-19 नवंबर को चीन के शेनझेन में एपीईसी सम्मेलन में हो सकती है

मास्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक का प्रस्ताव दिया है, जिस पर डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सहमति जताई है। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक अगले महीने 18 और 19 नवंबर को चीन के शेनझेन शहर में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपीईसी) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। इस संभावित बैठक की सबसे खास बात यह है कि इसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को शामिल करने की कोई योजना नहीं है।


इस बैठक पर अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है और चीन ने अमेरिकी अधिकारियों से इस प्रस्ताव को लेकर जानकारी मांगी है। यदि तीनों नेताओं की मुलाकात होती है, तो इसमें यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर चर्चा हो सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 19 अक्टूबर को पुष्टि की कि बैठक को लेकर बातचीत हुई है, लेकिन कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध समाप्त करने के हर संभव रास्ते पर विचार करने को तैयार हैं। ट्रंप ने स्वयं भी पुतिन और जिनपिंग से ज़ेलेंस्की के बिना मिलने की इच्छा व्यक्त की है, हालांकि उन्होंने बैठक होने की पुष्टि नहीं की।


वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता ने इस विचार को शुरुआती स्तर का बताया जबकि चीन के विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने उन्हें जानकारी दिए बिना यूक्रेन की स्टारलिंक इंटरनेट सेवा पर पाबंदियां लगाई हैं, जो यूक्रेनी सेना के लिए अहम है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने रूस, अमेरिका और चीन के बीच संभावित बैठक पर आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि यूक्रेन को बातचीत से बाहर रखना रूस को युद्ध जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा। ट्रंप ने ज़ेलेंस्की पर युद्ध समाप्त करने में रुचि न दिखाने का भी आरोप लगाया है। इस मुलाकात से यूरोपीय देशों के साथ उसके संबंधों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि वे यूक्रेन का समर्थन करते हैं।

 

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