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Pakistani पुलिस पर टूट पड़ी जनता, 5 को मार डाला

Pakistani पुलिस पर टूट पड़ी जनता, 5 को मार डाला

पीओके में इंटरनेट बंद, चप्पे-चप्पे पर फौज तैनात

मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में इस समय हालात बेहद विस्फोटक बने हुए हैं और आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। रविवार देर रात एक प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार के दौरान पाकिस्तानी सेना और स्थानीय लोगों के बीच हुई हिंसक झड़प ने आग में घी का काम किया है। आरोप है कि सुरक्षा बलों ने जनाजे में शामिल लोगों पर बल प्रयोग किया, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया। इस ताजा हिंसा के बाद पाकिस्तानी सेना ने प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह घेर लिया है। क्षेत्र में भड़की हिंसा में अब तक कुल 8 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 5 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। रावलकोट और मुजफ्फराबाद समेत कई इलाकों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया गया है। यह बवाल जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में हो रहा है, जिसने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। संगठन ने आगामी 9 जून को एक ऐतिहासिक महाआंदोलन और बड़े मार्च का ऐलान किया है, जिससे चुनाव से ठीक पहले माहौल और अधिक हिंसक होने की आशंका है। दूसरी ओर, सरकार ने इस संगठन पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करते हुए इसे अराजकता फैलाने वाला समूह घोषित किया है। हालांकि, कमेटी के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और इसे आतंकवाद से जोड़ना अन्याय है।

कमेटी की मुख्य मांग विधानसभा में उन 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की है, जो जम्मू-कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए तय हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन सीटों के जरिए बाहरी लोग और पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां यहां की राजनीति को नियंत्रित करती हैं। इसके अलावा लोग सस्ती बिजली, आर्थिक सुधारों और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी मांगों को लेकर भी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पीओके में बिगड़ती कानून-व्यवस्था स्थानीय प्रशासन और पुलिस की गंभीर विफलता को दर्शाती है। पाकिस्तान इस समय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), बलूच विद्रोहियों और अफगान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। इस वजह से सुरक्षा बलों के संसाधनों को दूसरे मोर्चों पर लगाना पड़ा है, जिससे यहां की स्थिति बेकाबू हो गई है। हालात को संभालने के लिए अब विशेष अर्धसैनिक बलों और रेंजर्स की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। मुजफ्फराबाद में लॉकडाउन की आशंका के कारण लोग जरूरी सामान जमा करने में जुट गए हैं, जबकि चप्पे-चप्पे पर सेना की तैनाती और संचार माध्यमों पर लगी पाबंदी से स्थानीय जनता में भारी असंतोष है।

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