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ईटिंग डिसऑर्डर पर ध्यान दें

ईटिंग डिसऑर्डर पर ध्यान दें

भूख लगना और भूख लगने पर भोजन करना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन कई बार लोगों को भोजन करने के बाद भी लगातार लगती भूख रहती है। इसे ईटिंग डिसऑर्डर कहते हैं।यह एक तरह का मेंटल डिसऑर्डर होता है, जिसमें व्यक्ति कभी तो जरूरत से भी ज्यादा खाता है तो कभी बहुत ही कम खाता है। इतना कम कि उसका वजन कम हो जाता है और बॉडी मास भी घट जाता है।
हालांकि लगातार भूख लगते रहने का कारण हमेशा इटिंग डिसॉर्डर नहीं होता है। कई बार शरीर में किसी प्रकार के पोषण की कमी, जीवनशैली में असंतुलन या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है।
कई बार ऐसा देखने में आता हैं कि कुछ लोगों को खाना खाने के कुछ देर बाद ही फिर से भूख लगने लगती है। और ऐसा एक बार नही होता बल्कि ऐसे लोगों को थोड़ी-थोड़ी देर बार भूख लगती रहती है या खाने की इच्छा होती रहती है। अगर ऐसे में उसे तुरंत खाने को ना मिले तो उसमें चिड़चिड़ापन, सिरदर्द तथा किसी काम में ध्यान ही नहीं लगने जैसे अलग-अलग लक्षण नजर आने लगते हैं। जानकार मानते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण नजर आते हैं तो उन्हे अनदेखा बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई बार यह किसी शारीरिक बीमारी या मानसिक अवस्था के लक्षण भी हो सकते हैं।
आयुर्वेदानुसार जठराग्नि का तीब्र या विषम होने से भी यह रोग होता हैं ।
सामान्य तौर पर लोगों को भोजन के बाद फिर से भूख लगने में कुछ घंटों का समय लगता है। वहीं ऐसे लोग जिनके भोजन का समय निर्धारित होता है उन्हे आमतौर पर उसी समय भूख लगने लगती है। लेकिन कभी-कभी कुछ विशेष परिसतिथ्यों में समय पर भरपेट भोजन करने के बावजूद कुछ लोगों को जल्दी-जल्दी भूख लगती रहती है।वैसे तो सामान्य परिस्तिथ्यों में गर्भवती महिलाओं, बढ़ते बच्चों या ज्यादा शारीरिक मेहनत करने के बाद लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा भूख लग सकती है, जो सामान्य है। लेकिन यदि भोजन करने के तत्काल बाद या कुछ मिनटों में ही दोबारा भूख लगने लगे, खाने की इच्छा इतनी प्रबल हो जाए की कुछ भी खाने के लिए ना मिलने पर असहजता महसूस होने लगे, तो यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसा सिर्फ शारीरिक ही नही बल्कि मानसिक समस्याओं के कारण भी हो सकता है।
आमतौर पर लगातार भूख लगने के लिए इटिंग डिसॉर्डर के अलावा शरीर में प्रोटीन, वसा, फाइबर या पानी की कमी को मुख्य कारणों में से गिना जाता है। वहीं कई बार तनाव, अवसाद, घबराहट और बैचेनी में भी ऐसा हो सकता है। इसके अलावा भी कुछ अन्य कारण भी हैं जिन्हे जल्दी-जल्दी भूख लगने के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
जल्दी-जल्दी भूख लगना मधुमेह के प्राथमिक लक्षणों में से गिना जाता है। मधुमेह होने पर यदि शरीर में रक्त शर्करा का स्तर ज्यादा बढ़ जाए तो लगातार भूख लगने के अलावा बहुत ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा थकान महसूस होना तथा वजन कम होने जैसे लक्षण भी नजर आने लगते हैं।हाइपोग्लाइसीमिया यानी लो ब्लड शूगर होने पर भी भूख का स्तर बढ़ सकता है।कई लोग बहुत तेज गति से भोजन करते हैं। कई बार इस कारण से भी लोगों को जल्दी-जल्दी भूख लगने की समस्या हो सकती है। इस बात की पुष्टि कई शोधों में भी चुकी है।पर्याप्त मात्रा में नींद ना लेने से भी ज्यादा भूख लगने की समस्या हो सकती है। दरअसल मस्तिष्क और इम्यून सिस्टम के सही तरह से कार्य करने के लिए जरूरी मात्रा में नींद बहुत जरूरी होती है। यही नही पर्याप्त मात्रा में नींद लेना भूख को नियंत्रित रखने के लिए इसलिए भी जरूरी माना जाता है क्योंकि इससे भूख को बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन नियंत्रित रहता है। नींद की कमी से घ्रेलिन का स्तर बढ़ जाता है, और जल्दी जल्दी भूख लगने जैसी समस्या हो सकती है।कई बार शरीर में प्रोटीन, फाइबर, या पानी की कमी होने पर भी यह समस्या हो सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और इसके प्रभाव के चलते उसे कुछ अन्य शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है तो उसे तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि कई बार सामान्य समस्याओं के अलावा गंभीर बीमारियों के होने का संकेत भी हो सकता है।
बचाव
1- इस स्थिति से बचने के लिए रोजाना तीनों वक्त का खाना खाएं और वह पौष्टिक हो। सही समय पर ब्रेकफस्ट, लंच और डिनर करें।
2- दही, फ्रूट्स, छाछ के अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां और फल खाएं। अगर एकदम से खाने-पीने में दिक्कत आ रही हो तो फिर धीरे-धीरे शुरू करें। जैसे कि ब्रेकफ़ास्ट न करने का मन हो तो एक रोटी खा लें। इसी तरह लंच और डिनर भी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में करें। धीरे-धीरे इस मात्रा को सामान्य करने की कोशिश करें। ऐसा करने से आपको सही खान-पान की आदत हो जाएगी।
3- एनोरेक्सिया से पीड़ित इंसान के लिए खाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि वह किसी भी चीज के तात्कालिक सुख को महसूस नहीं कर पाता। ऐसा व्यक्ति खाने का स्वाद भूल सा जाता है और इस चक्कर में कुछ भी खाता रहता है।
4- नियमित तौर पर थोड़ी मात्रा में कुछ हेल्दी खाने की आदत डाले।
5- कई लोग दोस्तों और अन्य लोगों के प्रेशर में आकर खाना-पीना छोड़ देते हैं। ऐसा बिल्कुल भी न करें। लोगों की बातों पर ध्यान न दें और एक हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें।
6- जब भूख लगे तब खाएं। जबरदस्ती भूखा न रहें। सही वक्त पर खाएं। ऐसा करने से न सिर्फ खान-पान संबंधी बीमारी दूर हो जाएगी बल्कि आप हेल्दी भी हो जाएंगे।
इलाज
ईटिंग डिसऑर्डर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति में खान-पान संबंधी बीमारी किस तरह की है और उसका लेवल क्या है। ईटिंग डिसऑर्डर के लिए कई तरह की थेरपी दी जाती हैं, जिनमें आर्ट थेरपी, रिक्रिएशन थेरपी और म्यजिक थेरपी प्रमुख हैं। इसके अलावा बिहेवियरल थेरपी, कॉग्निटिव रेमेडिएशन थेरपी, फैमिली थेरपी और इंटरपर्सनल सायकोथेरपी भी की जाती हैं।

 

 

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