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‘मन की बात’ देश की आत्मा से जुड़ाव का माध्यम: प्रेरणा, दिशा और विश्वास का स्रोत : Deputy CM Shukla

‘मन की बात’ देश की आत्मा से जुड़ाव का माध्यम: प्रेरणा, दिशा और विश्वास का स्रोत : Deputy CM Shukla

भोपाल/उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि ‘मन की बात’ सिर्फ संवाद नहीं, यह देश की आत्मा से जुड़ाव का माध्यम है — प्रेरणा, दिशा और विश्वास का स्रोत है। प्रधानमंत्री मोदी का मार्गदर्शन सदैव प्रेरणादायक होता है। ‘मन की बात’ की 123वीं कड़ी ने जन-मन में नई ऊर्जा का संचार किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र की ऐतिहासिक उपलब्धियों, योग और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों के साथ-साथ आपातकाल की विभीषिका को भी याद किया। आपातकाल का दौर लोकतंत्र के लिए एक काली रात था, जिसे देशवासियों ने अपने साहस और दृढ़ संकल्प से समाप्त किया। यह हमारी लोकतांत्रिक चेतना की अमिट मिसाल है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रीवा के बूथ क्रमांक 111 स्थित निवास में प्रधानमंत्री श्री मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम "मन की बात" का श्रवण किया।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश के बालाघाट की बेटी सुश्री सूमा उइके, जिन्होंने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मशरूम उत्पादन, पशुपालन और ‘दीदी केंटीन’ जैसे उद्यमों से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की। प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में सुश्री सूमा उइके का उल्लेख प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। साथ ही यह अन्य महिलाओं को प्रेरित और प्रोत्साहित करेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भारत का ‘ट्रेकोमा मुक्त’ घोषित होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य कर्मियों की सतत मेहनत का परिणाम है वरन् यह ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘जल जीवन मिशन’ की सामूहिक सफलता का भी परिचायक है। यह जनसहभागिता आधारित स्वास्थ्य सुधार मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘फिटनेस के लिए 10% तेल कम’ जैसे छोटे लेकिन प्रभावशाली सुझाव हर घर को स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाने का सरल मंत्र हैं। फिटनेस और वेलबीइंग के लिए यह सतर्कता, न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे राष्ट्र को सशक्त बनाती है। ‘योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ’ की भावना को वैश्विक मंच पर जिस गरिमा से प्रस्तुत किया गया, वह भारत की प्राचीन जीवन पद्धति की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। 10 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का विस्तार, लाखों लोगों की सहभागिता और विशाखापत्तनम से हिमालय तक की प्रेरक झलकियाँ, भारत की ‘जनभागीदारी से जनस्वास्थ्य’ की दिशा में अद्वितीय यात्रा को दर्शाती हैं।

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