France की सड़कों पर उतरे लाखों छात्र, नेपाल जैसे हालात!
पेरिस। यूरोप के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक फ्रांस इस समय युवाओं के अभूतपूर्व आक्रोश का सामना कर रहा है, जिसे कई विश्लेषक बांग्लादेश और नेपाल में हालिया छात्र आंदोलनों से तुलना कर रहे हैं। पेरिस सहित कई बड़े शहरों में लाखों स्कूली छात्र अपनी किताबें छोड़कर सड़कों पर उतर आए हैं, विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। नॉर्थ-ईस्टर्न पेरिस में 17 वर्षीय सोफिया जैसी छात्राएं अपनी स्पैनिश क्लास छोड़कर कचरे के बड़े डिब्बों और बैरिकेड्स पर डटी नजर आ रही हैं। यह गुस्सा केवल शिक्षण व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि इमैनुएल मैक्रों सरकार की आर्थिक नीतियों, शिक्षा सुधारों और युवाओं के सिकुड़ते भविष्य को लेकर फूटा है। हाई स्कूलों के गेट जाम कर बैठे इन युवा प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि शिक्षा बजट में की गई कटौती को तुरंत वापस लिया जाए, छात्रों के भत्तों में बढ़ोतरी की जाए और रोजगार से जुड़ी नीतियों में सुधार किया जाए। युवाओं के इस व्यापक आक्रोश ने फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विश्लेषक इसे एशिया के हालिया जनआंदोलनों की तर्ज पर देख रहे हैं, जहां युवाओं की लामबंदी ने दशकों पुरानी सरकारों की नींव हिला दी थी और सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी गई थी।
पेरिस के ‘लिसी वोल्टेयर’ स्कूल में पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि यह युवाओं का एक बहुत बड़ा विरोध आंदोलन बन जाएगा।” यह छात्रा सैकड़ों दूसरे छात्रों के साथ मिलकर स्कूल का गेट ब्लॉक करने के दूसरे दिन वहां मौजूद थी, ताकि सभी क्लास रद्द हो जाएं। उसने कहा, “हम बस इतना चाहते हैं कि सरकार हमारी बात सुने। खराब हालात में पढ़ाई करने के बजाय हम यहां खड़े होकर विरोध करना बेहतर समझते हैं। अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का यही एकमात्र तरीका है।” कार्डबोर्ड पर लिखे एक साइन पर लिखा था, “स्कूल एक अधिकार है, कोई विशेषाधिकार नहीं।” शिक्षा में सरकारी निवेश की कमी, जर्जर इमारतों में 40 बच्चों तक से भरी क्लास, शिक्षकों की कम सैलरी, स्टाफ की गैर-मौजूदगी और एक ऐसा असमान सिस्टम जिसमें सफलता सामाजिक बैकग्राउंड से तय होती थी। विरोध के अन्य कारणों में यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए मुश्किल ऑनलाइन सिस्टम और गर्मी के मौसम के दौरान क्लासरूम में असहनीय तापमान शामिल थे। सोफिया ने आरोप लगाया कि शिक्षा के बजट में भारी कटौती की जा रही है, जबकि सेना को बहुत ज़्यादा अतिरिक्त फ़ंडिंग मिल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विरोध-प्रदर्शन अगले हफ़्ते भी जारी रहेगा, जिसमें कई शिक्षक भी समर्थन में खड़े हैं। फ्रांसीसी सरकार इस हफ्ते देश भर में स्कूलों के बाहर हज़ारों किशोरों के प्रदर्शन से सकते में है। छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को पर्याप्त फ़ंड नहीं मिल रहा और उसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। सैकड़ों युवाओं को गिरफ़्तार किया गया है और आंदोलन अगले हफ़्ते भी जारी रहने की आशंका है। छात्रों ने क्लासरूम की मुश्किल स्थितियों का ज़िक्र किया है, जैसे छत का गिरना, पानी का टपकना, कॉकरोच और जर्जर इमारतें, साथ ही टीचिंग स्टाफ की कमी भी एक बड़ी समस्या बताई गई है।
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