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Indians अमेरिकियों की नौकरियां नहीं छीन रहे बल्कि अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे

Indians अमेरिकियों की नौकरियां नहीं छीन रहे बल्कि अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे

अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों को लेकर गढ़ा जा रहा नया राजनीतिक नैरेटिव

वाशिंगटन। अमेरिका में इन दिनों भारतीय पेशेवरों और एच-1बी वीजा धारकों को लेकर एक नया राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश हो रही है। राष्ट्रपति ट्रंप से लेकर दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट लॉरा लूमर तक कई लोग यह दावा कर रहे हैं कि भारतीय अमेरिका के लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़े इस दावे की पूरी तरह पोल खोलते नजर आते हैं। सच्चाई यह है कि भारत आज अमेरिका के लिए सिर्फ प्रतिभा उपलब्ध कराने वाला देश नहीं, बल्कि रोजगार और निवेश देने वाला आर्थिक साझेदार बन चुका है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राजनीति में भारतीयों के खिलाफ बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। जुलाई 2025 में ट्रंप ने कहा था कि भारत में कर्मचारियों को रखने का दौर खत्म हो चुका है। वहीं लॉरा लूमर ने भारतीयों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा कुछ अन्य दक्षिणपंथी नेताओं ने भी एच-1बी वीजा व्यवस्था को अमेरिकी युवाओं के खिलाफ बताया था। हालांकि अमेरिकी वाणिज्य विभाग और विभिन्न उद्योग संगठनों की रिपोर्ट इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की हैं। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक भारत से अमेरिका में करीब 16.4 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश किया गया है, जिससे वहां 70 हजार से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिला है।

वहीं भारतीय उद्योग परिसंघ की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय कंपनियों का कुल निवेश 40 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसके कारण करीब 4.25 लाख अमेरिकी नागरिकों को रोजगार मिला है। भारतीय कंपनियां केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। अमेरिका में अनुसंधान परियोजनाओं पर करीब 1 बिलियन डॉलर का निवेश भारतीय कंपनियों ने किया है। भारतीय कंपनियां अमेरिका में केवल मुनाफा कमाने का काम नहीं कर रहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। भारतीय उद्योगों ने अमेरिका में करीब 195 मिलियन डॉलर सामाजिक कार्यों और सामुदायिक विकास पर खर्च किए हैं। फार्मा, टेक्नोलॉजी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां अमेरिका की आर्थिक रीढ़ बनी हुई हैं। ऐसे में भारतीयों पर नौकरियां छीनने का आरोप लगाने के बजाय अमेरिकी नेताओं को यह स्वीकार करना होगा कि भारत और अमेरिका की आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी साबित हो रही है।

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