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लगान से बॉलीवुड में छाने वाली Gracy Singh अब फिल्मी चकाचौंध से दूर जी रही हैं आध्यात्मिक जीवन

लगान से बॉलीवुड में छाने वाली Gracy Singh अब फिल्मी चकाचौंध से दूर जी रही हैं आध्यात्मिक जीवन

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री ग्रेसी सिंह का नाम उन गिनी-चुनी अभिनेत्रियों में शुमार है, जिन्होंने बेहद कम समय में फैंस के दिलों में एक खास जगह बनाई। अपनी सादगी, सहज अभिनय और दमदार किरदारों के दम पर वह पूरी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहीं। साल 2001 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘लगान’ ने उन्हें रातोंरात एक बड़ा स्टार बना दिया। इस फिल्म में आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उनकी मासूम अदाकारी ने हर किसी का दिल जीत लिया। हालांकि, एक शानदार शुरुआत और कई सफल फिल्मों के बावजूद, ग्रेसी सिंह धीरे-धीरे बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर होती चली गईं। ग्रेसी सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक डांसर के रूप में की थी। वह ‘द प्लैनेट्स’ डांस ग्रुप के साथ कई स्टेज शो और इंटरनेशनल टूर का हिस्सा रहीं। इसके बाद उन्होंने 1997 में टीवी सीरियल ‘अमानत’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा और छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बनाई।

टीवी पर मिली पहचान के बाद उन्हें दिग्गज निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की ऐतिहासिक फिल्म ‘लगान: वन्स अपॉन ए टाइम इन इंडिया’ में काम करने का मौका मिला। आमिर खान द्वारा निर्मित इस फिल्म में ग्रेसी ने गौरी का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने एक समान रूप से खूब सराहा और यह उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। लगान न केवल बॉक्स ऑफिस पर एक जबरदस्त सुपरहिट साबित हुई, बल्कि इसे ऑस्कर के बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में भी नामांकन मिला। यह सम्मान पाने वाली मदर इंडिया और सलाम बॉम्बे के बाद तीसरी भारतीय फिल्म बनी, जिसने ग्रेसी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इस अभूतपूर्व सफलता के बाद ग्रेसी सिंह बॉलीवुड की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में से एक बन गईं और उनके पास कई फिल्मों के प्रस्ताव आने लगे।


इसके बाद उन्होंने मुन्ना भाई एमबीबीएस, गंगाजल और अरमान जैसी महत्वपूर्ण फिल्मों में काम किया। मुन्ना भाई एमबीबीएस और गंगाजल को बड़ी सफलता मिली और इन फिल्मों में उनके अभिनय को भी सराहा गया, लेकिन अरमान बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। इसके बाद उनकी कई फिल्में, जैसे चंचल, देशद्रोही और देख भाई देख, लगातार फ्लॉप होती रहीं। इन असफलताओं का असर उनके फिल्मी करियर पर साफ दिखाई दिया और उन्हें बॉलीवुड में पहले जैसी पहचान और सफलता नहीं मिल सकी। हिंदी फिल्मों में सफलता कम होने के बाद ग्रेसी सिंह ने तमिल, तेलुगु, मलयालम, गुजराती, पंजाबी और बंगाली फिल्मों में भी हाथ आजमाया। हालांकि, वहां भी उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली और अंततः उन्होंने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। ग्रेसी ने कई इंटरव्यू में यह स्पष्ट किया है कि अभिनय उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य कभी नहीं था और न ही उन्हें एक सुपरस्टार बनने की कोई विशेष इच्छा थी।

साल 2015 में उन्होंने टीवी शो ‘संतोषी मां’ से छोटे पर्दे पर शानदार वापसी की। इस पौराणिक धारावाहिक में देवी संतोषी मां के रूप में उनके अभिनय को दर्शकों ने बेहद पसंद किया और नई पीढ़ी के बीच भी उन्हें एक नई पहचान मिली। समय के साथ ग्रेसी सिंह आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज से गहराई से जुड़ गईं। वह अब अक्सर आध्यात्मिक जीवन, आत्मसंतोष और प्रसिद्धि से परे सच्ची खुशी की बात करती हैं। ग्रेसी सिंह अभी भी अविवाहित हैं और फिल्मों की चकाचौंध से दूर एक शांत, संतुलित और आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं। उनकी कहानी इस बात का एक प्रेरक उदाहरण है कि जीवन की सच्ची सफलता केवल शोहरत में नहीं, बल्कि अपने मन की शांति और आंतरिक संतुष्टि में भी छिपी होती है।

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