विलेन से लेकर संवेदनशील किरदारों तक: Prakash Raj का शानदार फिल्मी सफर
मुंबई। ‘आली रे आली, आता तुमची बारी आली’यह डायलॉग सुनते ही जयकांत शिकरे का खौफनाक चेहरा सामने आ जाता है, जिसे प्रकाश राज ने फिल्म सिंघम में जीवंत किया था। अपने किरदार को और प्रभावशाली बनाने के लिए उन्होंने बॉडी लैंग्वेज में बदलाव करते हुए गुस्से को हाथों की खास हरकतों से जाहिर किया, जो स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था। यही समर्पण उन्हें हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा का दमदार विलेन बनाता है। प्रकाश राज का असली नाम प्रकाश राय है, लेकिन फिल्मों में आने के बाद उन्होंने अपना सरनेम बदलकर ‘राज’ कर लिया, जो आज उनकी पहचान बन चुका है। फिल्मी बैकग्राउंड से न होने के कारण उनके लिए शुरुआत आसान नहीं थी। काम की तलाश में वे एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक पैदल जाते थे। फिल्मों और टीवी में आने से पहले वे थिएटर कलाकार थे, जहां उन्हें महीने के लगभग 300 रुपये मिलते थे। थिएटर के बाद उन्हें दक्षिण भारतीय टीवी सीरियल्स में काम मिलने लगा। कन्नड़ भाषी होने के बावजूद उन्होंने तमिल, तेलुगू और मलयालम भाषाओं में भी काम किया। शुरुआती दिनों में भाषा उनके लिए चुनौती रही, लेकिन उन्होंने मेहनत से सभी भाषाएं सीखीं और आज वे खुद अपनी फिल्मों की डबिंग करते हैं।
तमिल सिनेमा में उन्हें पहचान डूएट से मिली, जहां बड़े कलाकारों के बीच भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। इसके बाद घिल्ली, पोकिरी और ओक्काडू जैसी फिल्मों में उनके खलनायक किरदारों ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हिंदी सिनेमा में उनकी एंट्री वान्टेड से हुई, जिसके बाद सिंघम रिटर्न, दबंग 2 और हीरोपंती जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी विलेन की छवि को और मजबूत किया। हालांकि, उन्होंने खुद को सिर्फ नकारात्मक किरदारों तक सीमित नहीं रखा। अभिउम नानम, आकाशमंथा और धोंनी जैसी फिल्मों में उन्होंने एक संवेदनशील पिता का किरदार निभाकर दर्शकों को भावुक कर दिया। अपने अभिनय से हर भावना को पर्दे पर उतारने वाले प्रकाश राज आज भी इंडस्ट्री के सबसे बहुमुखी अभिनेताओं में गिने जाते हैं।
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