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अदालत का उद्देश्य जानवरों को निर्ममता से हटाना नहीं: Sonam Bajwa

अदालत का उद्देश्य जानवरों को निर्ममता से हटाना नहीं: Sonam Bajwa

मुंबई। पंजाबी फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री सोनम बाजवा ने आवारा कुत्तों से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान से भावुक अपील की है। सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट साझा करते हुए सोनम बाजवा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स को बड़े पैमाने पर सड़कों से हटाने या खत्म करने का कोई सीधा आदेश नहीं दिया है। उन्होंने सरकार से इस मामले में दया, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में सोनम बाजवा ने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को नियंत्रित तरीके से हटाने की बात कही है, जिसमें नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टरिंग जैसे वैज्ञानिक और मानवीय उपाय शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य जानवरों को निर्ममता से हटाना नहीं, बल्कि समस्या का संतुलित समाधान निकालना है। अभिनेत्री ने राज्य की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर पर्याप्त शेल्टर और बुनियादी सुविधाएं कहां हैं। उन्होंने कहा कि जब तक आवारा जानवरों के लिए सही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया जाता, तब तक उन्हें सड़कों से हटाने का फैसला बेजुबान जानवरों के लिए सजा जैसा साबित हो सकता है।

सोनम ने कहा कि इंसानों की सुरक्षा निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन इसके साथ दया और जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से अनुरोध किया कि इस पूरे मुद्दे पर दोबारा गंभीरता से विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जो इंसानियत और संवेदनशीलता दोनों को साथ लेकर चले। सोनम ने सुझाव दिया कि सरकार को पशु कल्याण से जुड़े एनजीओ, पशु चिकित्सकों, स्थानीय प्रशासन और पब्लिक सेफ्टी एक्सपर्ट्स को साथ बैठाकर एक व्यावहारिक और मानवीय नीति तैयार करनी चाहिए। अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा कि हम बेजुबानों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, वही यह तय करता है कि एक समाज के तौर पर हमारी पहचान क्या है। उनकी यह पंक्ति सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है और कई लोग उनकी बात का समर्थन करते नजर आ रहे हैं। दरअसल, हाल ही में स्ट्रे डॉग्स से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी निर्देशों को बरकरार रखा था। अदालत ने कहा था कि पशु जन्म नियंत्रण यानी एबीसी कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किए जाने के कारण यह समस्या लगातार बढ़ रही है। कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वे नसबंदी और टीकाकरण जैसे उपायों को सख्ती से लागू करें।

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