दुनिया में बढ़ते तापमान के लिए जिम्मेदार हैं Cattle belching
- कार्बन डाईऑक्साइड नहीं ये गैस कारण
लंदन। दुनिया के कई देश बढ़ते तापमान से परेशान हैं। ठंडे मौसम के लिए पहचाने जाने वाले यूरोप में इस कदर गर्मी पड़ी कि कई देशों को रेड अलर्ट जारी करना पड़ गया। कई देशों के जंगलों में ऐसी आग लगी कि सब कुछ तबाह कर गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन हालात के लिए जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जिम्मेदार है। अभी तक माना जाता रहा है कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए वातावरण में लगातार बढ़ती हुई कार्बन डाईऑक्साइड जिम्मेदार है। लेकिन, अब वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग से कहीं ज्यादा जिम्मेदार मीथेन गैस है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही मीथेन गैस कार्बन डाईऑक्साइड के मुकाबले 25 गुना ज्यादा खतरनाक है। यही गैस ग्लोबल वॉर्मिग की बड़ी वजह है। हालांकि, वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने मीथेन के कारण वैश्विक जलवायु से निपटने का तरीका ढूंढ निकाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक बैक्टीरिया के जरिये ग्लोबल वार्मिंग को काबू किया जा सकता है। इस बैक्टीरिया का नाम है मेथेनोट्रॉफ्स है। रिसर्च कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी लॉन्ग बीच का दावा है कि इसकी मदद से ग्लोबल वॉर्मिंग में बड़ी भूमिका निभाने वाली मीथेन गैस को कम किया जा सकता है।
दरअसल शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि मेथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया प्राकृतिक तौर पर मीथेन गैस को कार्बन डाईऑक्साइड में बदलने का काम करता है। ये बैक्टीरिया हवा में मौजूद मीथेन को खाता है। इस दौरान ये हवा से मीथेन को हटाता रहता है। हालांकि, ये कम मात्रा में ही हवा से मीथेन को खत्म कर पाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बड़े पैमाने पर मेथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जाए, तब ग्लोबल वॉर्मिंग के असर को बहुत हद तक कम किया जा सकता है. मीथेन गैस को ग्रीनहाउस गैस भी कहते हैं। ये गैस आमतौर पर कृषि, कचरा निस्तारण और फैक्ट्री में उत्पान जैसे इंसानी गतिविधियों से निकलती है।
शोध रिपोर्ट के मुताबिक, मेथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया की मदद से साल 2050 तक 24 करोड़ टन मीथेन गैस को पर्यावरण में पहुंचने से रोकने में सफलता मिल सकती है। वैज्ञानिकों ने इस बैक्टीरिया का एक स्ट्रेन खोजा है। ये स्ट्रेन दूसरे बैक्टीरिया के मुकाबले मीथेन गैस को खाने में पांच गुना ज्यादा सक्षम होता है। मेथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया उन जगहों के लिए सबसे ज्यादा कारगर साबित हो सकता हैं, जहां मवेशियों के झुंड बहुत ज्यादा होते हैं। बता दें कि दुनियाभर में किए गए कई शोध की रिपोर्ट में बताया गया है कि मवेशियों की डकार में काफी मात्रा में मीथेन गैस पाई जाती है।
मेथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया मीथेन गैस का ऑक्सीकरण करके उसे कार्बन डाईऑक्साइड में तब्दील करता है। बता दें कि कार्बन डाईऑक्साइड मीथेन गैस के मुकाबले 25 गुना कम नुकसानदायक होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मेथेनोट्रॉफ्स बैक्टीरिया के जरिये ग्लोबल वॉर्मिंग का असर घटाने में कई चुनौतियां हैं।
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