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  • Saturday, 22 August 2026
Balochs ने मुनीर को दिया खुला अल्टीमेटम, 1971 की दिलाई याद

Balochs ने मुनीर को दिया खुला अल्टीमेटम, 1971 की दिलाई याद

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के भीतर आंतरिक हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में असंतोष की स्थिति है, तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहा विद्रोह अब एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है। बलूचिस्तान के नेताओं ने खुद को पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया है और अपनी स्वतंत्रता की वर्षगांठ भी मनाई है। इस बीच, बलूच नेतृत्व ने पाकिस्तानी सेना को एक कड़ा अल्टीमेटम जारी करते हुए इस क्षेत्र को तुरंत छोड़ने की मांग की है, अन्यथा 1971 के युद्ध की तरह गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। बलूचिस्तान की ओर से जारी बयानों में यह स्पष्ट किया गया है कि इस क्षेत्र की जमीन पर पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी पूरी तरह से अवैध है। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों पर कब्जा करने तथा स्थानीय नागरिकों के जीवन, संपत्ति और शांति के लिए लगातार खतरा पैदा करने का आरोप लगाया गया है। बलूच संगठनों ने पाकिस्तान की सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और अन्य सुरक्षा संस्थानों में कार्यरत गैर-बलूच नागरिकों से भी इस क्षेत्र को छोड़ने का आह्वान किया है।

इसके अलावा, पाकिस्तान की वायुसेना और नौसेना से जुड़े सैन्य उपकरणों और हथियारों को बलूच बलों को सौंपने की मांग की गई है, क्योंकि इन्हें बलूचिस्तान के संसाधनों से ही खरीदा गया था। बलूच नेतृत्व ने इतिहास का हवाला देते हुए पाकिस्तान को बांग्लादेश युद्ध की याद दिलाई है। उनका कहना है कि 1971 में जिस प्रकार पाकिस्तानी सेना को अपमानजनक स्थिति में पीछे हटना पड़ा था, वही स्थिति एक बार फिर उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही, ब्रिटिश सेना की भारत से विदाई और अफगानिस्तान से अन्य वैश्विक ताकतों की वापसी का भी उदाहरण दिया गया है। बलूच नागरिकों के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने की मांग करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वह बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे और पाकिस्तानी सैन्य बलों की वापसी सुनिश्चित करवाए। ऐतिहासिक दावों के अनुसार, बलूचिस्तान ने 14 अगस्त के बजाय 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। उनका तर्क है कि अतीत में इस क्षेत्र की स्वतंत्रता को स्वीकार किया गया था, लेकिन बाद में इसे बलपूर्वक मिला लिया गया। वर्तमान में भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे पाकिस्तान का हिस्सा माना जाता हो, लेकिन बलूच पक्ष ने कभी भी इसे स्वीकार नहीं किया है और लगातार अपनी संप्रभुता की मांग पर अडिग है।

 

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