America के हथियार घटे, नाटो पर सीधे हमले की तैयारी में पुतिन
मॉस्को। अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आने वाले कुछ वर्षों में नाटो की एकजुटता और उसकी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए किसी सदस्य देश पर सीमित हमला कर सकते हैं। यह हमला पूर्ण युद्ध की शुरुआत के बजाय ऐसा कदम हो सकता है, जिससे नाटो के सबसे अहम सिद्धांत ऑर्टिकल 5 की प्रतिक्रिया को परखा जा सके। इसके तहत एक सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। अमेरिकी आकलन में आशंका जताई गई है कि रूस बाल्टिक देशों- लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया के अलावा पोलैंड को निशाना बना सकता है। रूस साइबर हमलों, तोड़फोड़ और सीमित सैन्य घुसपैठ जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है। रणनीति ऐसी हो सकती है, जिससे तनाव तो बढ़े, लेकिन नाटो तुरंत बड़े युद्ध में न कूदे।हाल के घटनाक्रमों ने इन आशंकाओं को और बढ़ाया है। जर्मनी के एक एयरपोर्ट के कार्गो क्षेत्र में विस्फोटक से लैस ड्रोन मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। ड्रोन में सैन्य स्तर के विस्फोटक होने की बात सामने आई है और इसके पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका की आशंका जताई गई है।
घटना के बाद जर्मनी की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक भी हुई। पिछले कुछ समय में नाटो देशों के आसपास संदिग्ध गतिविधियां बढ़ी हैं। मई में रोमानिया में एक इमारत पर विस्फोटक ड्रोन गिरने से दो लोग घायल हुए थे। पिछले साल सितंबर में पोलैंड के हवाई क्षेत्र में घुसे रूसी ड्रोन को नाटो लड़ाकू विमानों ने मार गिराया था। लगातार ऐसी घटनाओं को विशेषज्ञ रूस की हाइब्रिड वॉरफेयर रणनीति से जोड़ रहे हैं। संभावित खतरे के बीच अमेरिका के हथियार भंडार को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ईरान के साथ हालिया संघर्ष में अमेरिका अपने करीब 80 प्रतिशत थाड मिसाइल इंटरसेप्टर और लगभग आधे पैट्रियट सिस्टम इस्तेमाल कर चुका है। इससे भविष्य में नाटो के साथ संभावित टकराव या चीन से जुड़े किसी संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी सैन्य क्षमता पर असर पड़ सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के पास पर्याप्त गोला-बारूद है और उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इस बीच रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें भी ठप हैं। इस साल जनवरी से जून के बीच रूसी लंबी दूरी के हमलों में नागरिक मौतें पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 60 प्रतिशत बढ़ी हैं। ऐसे में युद्ध के लंबा खिंचने के साथ नाटो और रूस के बीच सीधे टकराव का खतरा भी गंभीर होता जा रहा है।
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