Akhilesh का लोधी दांव: बीजेपी के कोर वोट बैंक पर सपा की नजर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनावों से पहले, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक प्रमुख और पारंपरिक वोट बैंक, लोधी समाज को साधने का बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य की कुल आबादी का भले ही 4-5 प्रतिशत होने के बावजूद, लोधी समुदाय रुहेलखंड, ब्रज और बुंदेलखंड सहित करीब 23 जिलों और 65 विधानसभा सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखता है। ऐतिहासिक रूप से, ओबीसी समुदाय दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और वरिष्ठ नेता उमा भारती के प्रभाव के कारण बीजेपी का एक मजबूत आधार रहा है। मंडल आयोग के दौर से ही लोधी समाज ने बीजेपी को अपना पारंपरिक समर्थन दिया है। हालांकि, कल्याण सिंह के निधन और उमा भारती की सक्रिय राजनीति में कम होती भूमिका के बाद, सपा इस वोट बैंक में सेंधमारी का मौका देख रही है।
इसी कड़ी में अखिलेश यादव ने हाल ही में देश की स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राण न्यौछावर करने वाली वीरांगना अवंती बाई लोधी की 196वीं जयंती पर लखनऊ में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर उन्होंने राजधानी के गोमती रिवरफ्रंट पर अवंती बाई की सोने की तलवार के साथ भव्य प्रतिमा स्थापित करने और 16 अगस्त को उनकी जयंती पर शासकीय अवकाश घोषित करने का वादा किया। अखिलेश ने अपने कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव के लिए एक-एक वोट जोड़ने और अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के तहत सभी वर्गों को एक गुलदस्ते के रूप में साथ लाने का आह्वान किया। सपा का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में एटा में कल्याण सिंह के बेटे की हार और फर्रुखाबाद में बेहद कड़े मुकाबले जैसे नतीजों ने लोधी समाज में बिखराव के संकेत दिए हैं। इसी से उत्साहित होकर सपा ने हमीरपुर-महोबा जैसे लोधी बहुल क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया है। सपा केवल सांस्कृतिक घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि 2027 के चुनाव के लिए संभावित लोधी उम्मीदवारों की प्रोफाइल भी तैयार कर रही है। दूसरी ओर, बीजेपी भी अपने इस कोर वोट बैंक में संभावित सेंधमारी को लेकर पूरी तरह से सतर्क हो गई है।
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