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Chandrasekaran के पद छोड़ने के बाद टाटा चेयरमैन की दौड़ शुरु, नरेंद्रन का नाम चर्चा में

Chandrasekaran के पद छोड़ने के बाद टाटा चेयरमैन की दौड़ शुरु, नरेंद्रन का नाम चर्चा में

नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की घोषणा के साथ ही उनकी जगह लेने दौड़ शुरू हो गई है। शीर्ष पद की दौड़ में टाटा स्टील के टीवी नरेंद्रन का नाम उभरकर सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस पद के लिए टाटा कंपनियों के प्रमुखों, बोर्ड सदस्यों के साथ ही बाहरी उम्मीदवारों पर भी विचार किया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि कंपनी के अंदर चर्चित दावेदारों में टीवी नरेंद्रन, टाटा संस के मुख्य वित्त अधिकारी सौरभ अग्रवाल और टाटा मोटर्स के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ शैलेश चंद्र शामिल हैं। टाटा संस में उत्तराधिकारी चुनना कोई आसान प्रक्रिया नहीं है। टाटा संस के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 118 के मुताबिक चेयरमैन की नियुक्ति के लिए चयन समिति बनानी होती है। साइरस मिस्त्री की नियुक्ति के समय इसी प्रक्रिया का पालन किया गया था। इसी तरह मिस्त्री को हटाए जाने के बाद पांच सदस्यों वाली एक चयन समिति बनाई गई, जिसने बाद में एन चंद्रशेखरन के नाम पर मुहर लगाई। चंद्रा उस समय टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के प्रबंध निदेशक और सीईओ थे। मिस्त्री के मामले से अलग इस बार टाटा संस के पास उत्तराधिकारी की घोषणा करने के लिए सात महीने का समय है।


कानून के जानकारों का कहना है कि अगर चयन समिति किसी वजह से किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाती है तो जरूरी हालात को देखते हुए नोएल टाटा कंपनी के अंतरिम चेयरमैन बन सकते हैं। मिस्त्री को अचानक हटाए जाने के बाद 2016 में रतन टाटा ने टाटा संस के अंतरिम चेयरमैन का पद संभाला था। सुप्रीम कोर्ट में वकील एच पी रनिना ने कहा कि सबसे अहम बात तलाश या चयन समिति का गठन है। यह समिति व्यक्ति का नाम तय करेगी और फिर उसकी सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से की जाएगी। वकीलों ने इस बात का भी उल्लेख किया कि चंद्रशेखरन ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा है कि वे फरवरी 2027 में दोबारा नियुक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। समस्या यह है कि उन्होंने पहले ही नोटिस दे दिया है। इसलिए वे अहम फैसले नहीं लेंगे। अब टाटा संस के बाकी निदेशकों को अगले 5 से 6 महीनों तक या नए चेयरमैन नियुक्त होने तक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। रनिना ने कहा कि चूंकि निदेशकों को कॉरपोरेट गवर्नेंस के सिद्धांतों का पालन करना होता है इसलिए वे टाटा संस को सही दिशा देते रहेंगे।

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