हम जिस तरह लीबिया-Karabakh में घुसे थे, उसी तरह इजराइल में भी घुस सकते
-तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजराइल को दी सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी
अंकारा। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने इजराइल को सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है। अंकारा में एक संबोधन में उन्होंने कहा कि तुर्की जरूरत पड़ने पर इजराइल में उसी तरह हस्तक्षेप कर सकता है, जैसा वह पहले लीबिया और नागोर्नो-काराबाख में कर चुका है। एर्दोगन का यह बयान ऐसे समय में आया, जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि यह बातचीत नहीं चल रही होती, तो तुर्की इजराइल के खिलाफ कार्रवाई कर सकता था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अपने बयान में एर्दोगन ने कहा कि जिस तरह हम लीबिया और काराबाख में घुसे थे, उसी तरह हम इजरायल में भी प्रवेश कर सकते हैं। हमारे पास ताकत और क्षमता दोनों हैं। इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। तुर्की के राष्ट्रपति ने इजराइल पर लेबनान में संघर्षविराम का उल्लंघन करने और हवाई हमलों में निर्दोष लोगों की मौत का आरोप लगाया। उन्होंने इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू पर निशाना साधते हुए कहा कि वे गाजा से लेकर लेबनान तक “युद्ध अपराध” कर रहे हैं और “खून और नफरत में अंधे” हो चुके हैं।
बता दें एर्दोगन इससे पहले भी कई बार इजराइल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। गाजा में जारी संघर्ष के बाद उनके बयानों में और तीखापन देखने को मिला है। जुलाई 2024 में भी उन्होंने इजराइल को कड़ी चेतावनी दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्की द्वारा इस तरह की बयानबाजी उसके क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। एर्दोगन के नेतृत्व में तुर्की ने हाल के वर्षों में सीरिया, लीबिया और दक्षिण काकेशस जैसे क्षेत्रों में अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ाई है। दूसरी ओर इजराइल और तुर्की के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध रहे हैं और इस तरह के बयानों से दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर है, क्योंकि इसका असर मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है।
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