मतदाता की पहचान के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्धारित किए हैं दस्तावेज


ग्वालियर. नगरीय निकाय आम निर्वाचन कार्यक्रम के तहत होने वाले मतदान के दौरान मतदाताओं की पहचान स्थापित करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पहचान दस्तावेज निर्धारित किए गए हैं। इन पहचान दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज दिखाकर मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेगा। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदान के दौरान अपना मतदाता पहचान पत्र (इपिक) अथवा निर्धारित पहचान दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज लेकर अवश्य आएं।

जिला निर्वाचन कार्यालय (स्थानीय निर्वाचन) से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाताओं की पहचान के लिए विभिन्न प्रकार के दस्तावेज निर्धारित किए गए हैं। जिनमें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदत्त मतदाता पहचान पत्र (इपिक), भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका, पीला राशन कार्ड, नीला राशनकार्ड, राशन कार्ड, बैंक/किसान/डाकघर पासबुक, शस्त्र लायसेंस, संपत्ति दस्तावेज जैसे पट्टा व रजिस्ट्रीकृत अभिलेख, विकलांगता प्रमाण-पत्र, निराश्रित प्रमाण-पत्र, तेंदूपत्ता संग्राहक पहचान पत्र, सहकारी संपत्ति का प्रमाण-पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट, ड्रायविंग लायसेंस, आयकर पहचान पत्र (पेनकार्ड) राज्य या केन्द्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय अथवा अन्य निजी औद्योगिक घरानों द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए जारी किए गए सेवा पहचान पत्र, छात्र पहचान पत्र, सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व अधिवासी प्रमाण-पत्र, पेंशन दस्तावेज जैसे भूतपूर्व सैनिक पेंशन पासबुक, पेंशन अदायगी आदेश, भूतपूर्व सैनिक विधवा व विधवा का आश्रित प्रमाण-पत्र, रेलवे पहचान पत्र एवं स्वतंत्रता सेनानी पहचान पत्र शामिल हैं।

यह स्पष्ट किया गया है कि इन दस्तावेजों में कोई दस्तावेज यदि परिवार के मुखिया के पास ही उपलब्ध है तो उस परिवार के दूसरे सदस्यों की पहचान के लिये भी अनुमति दी जायेगी। इसी प्रकार यदि परिवार के किसी दूसरे सदस्य के नाम से कोई दस्तावेज है तो परिवार के अन्य सदस्य की पहचान के लिये उसका उपयोग किया जा सकता है। बशर्ते ऐसे दस्तावेज के आधार पर दूसरे सदस्य की पहचान स्थापित हो रही हो. इस सूची में दर्शाए गए अभिलेखों के अलावा पीठासीन अधिकारी ऐसा कोई अन्य अभिलेख भी स्वीकार कर सकेगा, जिससे मतदाता की पहचान स्थापित होती हो। यदि कोई मतदाता किसी भी प्रकार का दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो पीठासीन अधिकारी स्थानीय कोटवार, पटवारी, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका इत्यादि कर्मचारियों या किसी प्रतिष्ठित स्थानीय निवासी से उसकी पहचान स्थापित करने के बाद भी मतदान की अनुमति प्रदान की जा सकेगी। 

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