शहरी आय में तेलंगाना देश के सभी राज्यों से आगे, सुविधाओं में हैदराबाद शीर्ष पर

2025 तक तेलंगाना में शहरी आबादी और राज्य की कुल आय में शहरी इलाकों का हिस्सा 50 फीसदी हो जाने की संभावना है। देश के अन्य राज्यों के मुकाबले तेलंगाना में ऐसा लगभग ढाई दशक पहले होने जा रहा है। अब तक देश में शहरी जनसंख्या का राष्ट्रीय औसत कुल जनसंख्या का 31.16 प्रतिशत था और इसी अवधि में तेलंगाना में कुल जनसंख्या में शहरी आबादी की भागीदारी 46.8 प्रतिशत है।
नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी भागीदारी केवल तमिलनाडु और केरल ही तेलंगाना से आगे हैं। आयोग का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के असर से रोजगार और आय में कई गुना बढ़ोतरी होगी। तेलंगाना सरकार ने इस तथ्य को ध्यान में लखते हुए शहरी परिदृश्य को बदलने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।  राज्य सरकार के मुताबिक, शहरी स्थानीय निकाय राज्य के कुल भूमि क्षेत्र का महज तीन फीसदी होने के बाद भी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में करीब दो तिहाई योगदान करते हैं। मर्सर ने लगातार छह वर्ष तक हैदराबाद को ‘जीवन गुणवत्ता सूचकांक’ में भारत में सर्वश्रेष्ठ शहर करार दिया है।  

शहरी सुविधाओं के मामले में हैदराबाद शीर्ष पर
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अनुसार, देश के अन्य राज्यों में तेलंगाना के 25 साल बाद यानी 2050 तक शहरी आबादी का हिस्सा 50 फीसदी के स्तर तक पहुंच पाएगा। शहरी सुविधाओं के मामले में हैदराबाद देश में शीर्ष पर है। क्रय शक्ति, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, जीवन निर्वाह लागत, संपत्ति मूल्य से आय अनुपात, यातायात आवागमन समय और जलवायु आदि सूचकांकों में हैदराबाद सबसे ऊपर है। साथ ही गुणवत्ता और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के मामले में दुनिया के तीस प्रमुख शहरों में से एक है।

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