जन्मदिन विशेषः यशोधरा जी किसी परिचय की मोहताज नहीं, जनसेवा से पाया मुकाम


बन सहारा बे-सहारों के लिये,
बन किनारा बे-किनारों के लिये
जो जिये अपने लिये तो क्या जिये
जी सके तो जी हज़ारों के लिये।।

ये पंक्तियाँ मध्यप्रदेश की खेल एवं युवा कल्याण और तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया पर बिल्कुल फिट बैठती हैं। कर्तव्यनिष्ठ और सरल-सौम्य व्यक्तित्व की धनी यशोधरा राजे सिंधिया जी का आज जन्मदिन है। उन्हें इस विशेष दिन की अनंत शुभकामनाएं। आप निरंतर जनकल्याण के ध्येय के साथ आगे बढ़ती रहें। ईश्वर आपको स्वस्थ व दीर्घायु जीवन प्रदान करे।

यशोधरा जी ने कम समय में अपनी जनसेवा से उन्होंने राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटी यशोधरा राजे सिंधिया किसी के परिचय की मोहताज नहीं है। जीवाजीराव सिंधिया और विजयाराजे सिंधिया की सबसे छोटी बेटी यशोधरा राजे सिंधिया वर्तमान में शिवपुरी से विधायक हैं और वर्तमान सरकार में खेल एवं युवा कल्याण और तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार मंत्रालय में मंत्री हैं। यशोधरा राजे का जन्म 19 जून 954 को लंदन में हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा मुम्बई से पूरी हुई। बाद में कुछ वर्षों में उन्होने ग्वालियर में भी पढ़ाई की। राजनीति में महिलाओं की पक्षधर रहीं यशोधरा जी का नाम कभी अंजाना नहीं रहा। भाजपा की सरकार में भी उनकी सलाहों को बड़ी गंभीरता से सुना जाता है। उनका मानना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वता का मतलब राजनीतिक दुश्मनी नहीं है। विरोधियों का सम्मान भी पूरी शिद्दत के साथ किया जाना चाहिए।

यशोधरा जी को सिर्फ एक राजनीतिक दल के दायरे में बांध कर रखना उनके व्यक्तित्व के साथ अन्याय होगा। मध्य प्रदेश की राजनीति में उनके जैसी अनुभवी और जनता की नब्ज पकड़ने वाली महिला नेत्री नजर नहीं आती। 1994 में यशोधरा वापस भारत लौटी और अपनी मां और बहन की तरह सक्रिय राजनीति में कूद पड़ीं। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और साल 1998 में पहली बार शिवपुरी से  चुनाव जीत कर वह मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्य बनीं। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।  2003 में फिर से विधायक चुनी गयी। 2007 में ग्वालियर लोकसभा सीट से उपचुनाव जीतने के बाद शिवपुरी विधान सभा चुनाव से इस्तीफ़ा दिया और फिर अगले वर्ष 2008 में शिवपुरी से विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी चमक बिखेरी। वर्ष 2009 में फिर से ग्वालियर सीट से संसद पहुंची, जहां उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अशोक सिंह को पराजित किया। इस जीत के बाद उन्हें रेलवे और महिला सशक्तिकरण समिति का सदस्य बनाया गया। वर्ष 2013 में वह वाणिज्य , उद्योग और रोजगार के महकमों के साथ ही मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास केंद्र निगम भोपाल की अध्यक्ष बनाई गईं। 13 दिसंबर 2013 को लोक सभा सीट से इस्तीफ़ा देकर शिवपुरी से विधायक निर्वाचित हुईं। 2018  में शिवपुरी से फिर एक बार विधायक बनने में कामयाब हुईं। 

यशोधरा राजे सिंधिया एक ऐसी सियासतदां हैं जिनमें जनता की परेशानियों को समझने और तुरंत फैसले लेने की गजब की क्षमता है और कार्यकर्ता भाव जीवित रहने के कारण वे आज महिलाओं  में भी अत्यधिक लोकप्रिय हैं। वे जनमर्म को बखूबी समझती हैं। आम जनता के लिए वो एक ऐसी दीदी हैं जो अपने आवास में दिन- रात लोगों की सेवा में तल्लीन रहती हैं। वो भाजपा की ऐसी इकलौती नेता हैं जिसकी सियासत में असंभव कुछ भी नहीं  रहता। सत्ता पक्ष में रहीं, चाहे विपक्ष में अपनी राजनीतिक शक्ति और कौशल का कैसे इस्तेमाल करना है यह यशोधरा राजे सिंधिया से बेहतर कोई राजनेता नहीं जानता है।  नए-नए मुद्दों पर विचार विमर्श करना और हर पल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राज्य को विकास के मोर्चे पर आगे ले जाना तो मानो उनकी फितरत ही है।



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