भाजपा के चंदे में 79% गिरावट, माकपा की कमाई बढ़ी

कोरोना काल में भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों का चंदा वित्त वर्ष 2020-21 में घट गया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भाजपा के चंदे में 79.24% की कमी आई है। बावजूद पार्टी ने 2020-21 में 752.337 करोड़ रुपये घोषित किए हैं। इसमें उसे दान में 577.974 करोड़ रुपये मिले। यह खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग में जमा कराए गए ऑडिट रिपोर्ट के आकलन के आधार पर तैयार की गई है। 
कांग्रेस 58.11% कम चंदे के साथ दूसरे नंबर पर है। उसने 2020-21 में 285.765 करोड़ का ब्योरा दिया है। माकपा के चंदे में सात फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। भाजपा, कांग्रेस, माकपा, एनसीपी, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा और एनपीईपी ने 1373.783 करोड़ चंदा मिलने की घोषणा की है। भाजपा ने 620.398 करोड़ खर्च किए, जो कुल चंदा राशि का 82.46% है। कांग्रेस ने 209 करोड़ खर्च किए, जो 73.14% है। तृणमूल कांग्रेस ने 74.417 करोड़ रुपये के चंदे में से 78.52% खर्च किए। माकपा ने 171.046 करोड़ की राशि में से 59.52% खर्च किए हैं. बसपा व एनसीपी ने कुल चंदे में से क्रमश: 32.97 और 34.87 फीसदी राशि खर्च की है। एनपीईपी ने 69.80 लाख की सबसे कम चंदा राशि घोषित की है, जो राष्ट्रीय दलों के कुल चंदे का केवल 0.051 प्रतिशत है। भाजपा को दान में 577.974 करोड़, कांग्रेस को 95.424 करोड़, माकपा को 95.294 करोड़, तृणमूल कांग्रेस को 42.214 करोड़, एनसीपी को 26.261 करोड़ रुपये और एनपीईपी को 67.17 लाख मिले हैं। कांग्रेस ने सबसे अधिक कूपन से 156.907 करोड़ रुपये एकत्र किए। यह पार्टी की कुल चंदे का 54.91 फीसदी है। अनुदान, दान और योगदान के मद में पार्टी को 95.424 करोड़ मिले, जो कुल चंदे का 33 फीसदी से भी ज्यादा है।

माकपा की कमाई बढ़ी, अन्य की घटी
भाजपा के चंदे में 2019-20 के मुकाबले 2020-21 में 2870.943 करोड़ की कमी आई है। पार्टी ने पिछले वित्त वर्ष में 3623.28 करोड़ रुपये चंदे की घोषणा की थी यह घटकर 752.337 रुपये रह गई। वहीं, कांग्रेस के चंदे में 58.1 फीसदी यानी 396.445 करोड़ की कमी आई है। तृणमूल के चंदे में 48.20% कमी आई है। इसी तरह बसपा को 5.789 करोड़ यानी 9.94 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। केवल माकपा की कमाई बढ़ी है। उसे 158.62 करोड़ के मुकाबले 171.046 करोड़ रुपये चंदा मिला है। यह 7.83 फीसदी यानी 12.426 करोड़ रुपये अधिक है।
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