स्मृति शेष : आप सदैव हमारे साथ है


जन सारथी मीडिया के जनक योग शिरोमणि ब्रम्हलीन श्री दुर्गा सिंह तोमर जी की जयंती के अवसर पर जनसारथी मीडिया समूह परिवार ने अपने प्रेरणापुंज को हृदय से नमन किया। इस भावुक प्रसंग के दौरान सभी ने अपने मीडिया परिवार के देवलोकवासी संस्थापक द्वारा दिये गये सूत्र वाक्य "निष्पक्ष निर्भीक विचारधारा का प्रतीक" पर चलने का सामूहिक संकल्प दोहराया। ग्वालियर की पत्रकारिता में अस्सी के दशक में जनता की सच्ची आवाज़ बनकर हमारे पुरौधा श्री दुर्गा सिंह जी ने जिस ऊर्जा के साथ जनसारथी समाचार पत्र का श्रीगणेश कराया था.. उसने अपने दौर में धारदार पत्रकारिता की अनूठी मिसाल पेश की थी। इसी ऊर्जा को हम सभी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाते रहे.. यहीं स्वर्गीय दुर्गा सिंह जी के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम सभी ने ये ठाना हैं कि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता.. क्योंकि उन्होंने भी अपने जीवनकाल में लिये हर सामाजिक संकल्प को अपने देवतुल्य गुरू परम पूज्य योगीराज श्री चंद्रमोहन जी महाराज का आदेश मानकर पूरा किया। 

योग शिरोमणि श्री दुर्गा सिंह जी का पूरा जीवन अपने परम पूज्य गुरू श्री चंद्र मोहन जी महाराज के आशीर्वाद से हर क्षण बीता और गुरू आशीष ने ही उन्हें व्यक्ति से संस्था बनाते हुए बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न किया। वे प्रशासनिक दक्षता के धनी ऐसे वरिष्ठ अधिकारी भी सिद्ध हुए जिनकी सुझाई नीति की सराहना स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी तक ने की। जिस दौर में मीडिया योग के विषय से अछूता रहा.. उस दौर में उन्होंने जनसारथी के माध्यम से योग पर जनोपयोगी स्तंभ चलाया.. वे गुरू आदेश और प्रेरणा से योग साधना के उच्चतम शिखर तक पहुँचे। उनकी जीवनयात्रा इतनी प्रेरक और संदेश प्रधान रही कि वे एक वक्ता और उत्कृष्ट लेखक से लेकर संकल्पित साधक तक बने। उनकी लिखी पुस्तकें ‘योग पथ‘ और ‘कर्म पथ’ ऐसा दस्तावेज बनें जो एक साधक के आध्यात्मिक अनुभवों का संग्रह हैं.. इन पुस्तकों ने योग और अध्यात्म के क्षेत्र में सर्वोपरि योगदान दिया हैं जो आज देश के अनेक विद्वानों को आकर्षित कर रही हैं। वे एक आदर्शवादी व्यक्तित्व हुए। महाराजा मानसिंह तोमर को चिरस्थायी बनाने में उनकी भूमिका क्षत्रिय समाज कभी नहीं भूल सकता। वे राजपूत हितकारिणी सभा के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के संरक्षक थे इस  नाते उन्होंने सभी को सिखाया कि एक सच्चे क्षत्रिय के क्या कर्तव्य होने चाहिए। 

बेमिसाल.. विराट और रौबीले व्यक्तित्व के बीच  हृदय की विशालता ने उन्हें सर्वहारा वर्ग में लोकप्रियता दिलाई। वे सभी के बीच सम्मान का पात्र भी हमेशा रहे। व्यक्तित्व की ऐसी ही विशेषताओं ने उन्हें विश्व धर्म संसद से योग शिरोमणि की उपाधि और मुस्लिम समुदाय द्वारा अंजुमन ए तहज़ीब की उपाधि तक दिलाई। सन् 1999 में महात्मा गांधी लॉ कॉलेज का निर्माण एवं सुमित्रा फ़ाउंडेशन सोसायटी की स्थापना की... अपनी माटी से लगाव के चलते ही उन्होंने गृह ग्राम जोटई में विद्यालय स्थापित कराया ताकि गांव के नौनिहाल शिक्षा प्राप्त करके कल के बेहतर नागरिक बन सकें। उनकी जयंती पर न केवल उन्हें याद करना बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलने का दृढ निश्चय करना ही वास्तव में हम सभी को जीवन पथ पर अच्छा इंसान बना सकता हैं। कहते हैं न कि व्यक्ति तो चला जाता है लेकिन उसका व्यक्तित्व सदैव समाज की यादों में अमर हो जाता हैं.. हमारे प्रेरणास्रोत संरक्षक ब्रम्हलीन श्री दुर्गा सिंह जी भी अपनी अविस्मरणीय जीवन यात्रा के साथ ऐसे अनेकानेक जीवन सूत्रों के रूप में हम सभी का मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे... यहीं हमारी मान्यता है और यहीं हमारा अटूट विश्वास।

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