ज्योतिरादित्य सिंधिया का पॉलिटिकल हैडक्वाटर ग्वालियर से भोपाल शिफ्ट, ग्वालियर में घेराबंदी कर रहे हैं दिग्विजय सिंह

1993 से राजा दिग्विजय सिंह और महाराजा सिंधिया के बीच टकराव के समाचार अक्सर आते रहते हैं। पहले दोनों एक ही पार्टी में थे लेकिन अब विरोधी पार्टियों में हैं, इसलिए इस बार खुली जंग होगी, लेकिन जंग का मैदान क्या होगा। दिग्विजय सिंह ग्वालियर में घेराबंदी कर रहे हैं और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी राजधानी ही बदल दी। अब उनकी राजनीति का केंद्र भोपाल है।
मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन और उपचुनाव में कमलनाथ की टीम की करारी शिकस्त के बाद ग्वालियर चंबल अंचल पर दिग्विजय सिंह ने अपना फोकस बना लिया। पिछले दिनों ग्वालियर में कांग्रेस पार्टी की एक बड़ी मीटिंग हुई। इस मीटिंग में फैसला लिया गया कि ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेस पार्टी के सर्वाधिकार दिग्विजय सिंह के पास रहेंगे। दतिया में एक बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। सब कुछ ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने के लिए किया जा रहा है। इधर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी राजधानी ही बदल दी। सिंधिया राजपरिवार की राजनीति का केंद्र जय विलास पैलेस हुआ करता था लेकिन 9 मई 2022 को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना राजनीतिक मुख्यालय ग्वालियर से भोपाल शिफ्ट कर दिया। मध्यप्रदेश शासन की ओर से उन्हें एक ऐसा बंगला बना कर दिया गया है जो जय विलास पैलेस की याद ताजा करता है।
स्वतंत्रता प्राप्ति और मध्य भारत के गठन के बाद से 8 मई 22 तक सिंधिया राजपरिवार ने ग्वालियर से राजनीति की लेकिन इसका सबसे बड़ा खामियाजा उन्हें यह मिला कि वह हमेशा ग्वालियर चंबल के नेता बने रहे। जीवाजी राव सिंधिया, राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया तीनों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन उनकी पहचान हमेशा ग्वालियर बनी रही, मध्य भारत या मध्यप्रदेश नहीं हो पाई। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मध्यप्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन जब कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो उन्हें ग्वालियर में समेट दिया गया। सन 1993 के बाद से आज तक दिग्विजय सिंह ने सिंधिया राजपरिवार को कभी ग्वालियर से बाहर नहीं आने दिया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसी प्रॉब्लम को सॉल्व किया है। यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया का पॉलिटिकल हैडक्वाटर भोपाल होगा तो लोगों का माइंड सेट चेंज हो जाएगा। सिंधिया ग्वालियर के नहीं मध्य प्रदेश के नेता कहलायेंगे।


You May Also Like