महाकाल मंदिर के गर्भगृह में पुजारी प्रतिनिधि और पुजारी के बीच हुआ विवाद

भक्तों की आस्था के केंद्र महाकालेश्वर मंदिर में आए दिन विवाद हो रहे हैं जिससे मंदिर की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट पहुंच रही है। कभी दान की राशि जेब में रख ली जाती है तो कभी विवाद की बात पर सामने आती है।  
जानकारी के मुताबिक श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पं. महेश पुजारी और प्रदीप पुजारी के बीच हुए विवाद में प्रतिनिधि प्रशांत शर्मा (बबलु गुरु) कूद पड़े। इसके बाद जो लड़ाई गर्भगृह से शुरू हुई थी वह सड़क तक पहुंच गई और।  महेश पुजारी ने बताया 11 मई को गर्भगृह में प्रदीप गुरु करीब 15 लोगों को एक साथ पूजन करवा रहे थे। इस दौरान प्रदीप गुरु ने अन्य श्रद्धालुओं को गर्भगृह में आने से मना कर दिया। महेश पुजारी के साथ उनके मित्र की रसीद कटवाकर जल चढ़ाने पहुंचे थे। गर्भगृह में एक कोने में श्रद्धालु जल चढ़ाने गया तो प्रदीप गुरु ने अंदर आने पर बहस शुरू कर दी और श्रद्धालु को धक्का दे दिया। मामले के बाद महेश पुजारी ने मंदिर प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के के विपरीत गर्भगृह में अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को एक साथ पूजन कराने की व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रशासन को पत्र दिया। आरोप लगते हुए कहा कि गर्भगृह की व्यवस्था न्यायालय के निर्देश अनुसार करने के लिए मंदिर प्रशासन को पत्र देने के बाद से ही पुजारी दिलीप गुरु के प्रतिनिधि प्रशांत शर्मा (बबलु गुरु) द्वारा धमकी दी जा रही थी। 
शुक्रवार को महेश पुजारी मंदिर से लौट रहे थे। इसी दौरान गुदरी चौराहे पर प्रशांत शर्मा ने 11 मई को हुई घटना को लेकर विवाद किया। गुदरी चौराहा पहुंचते हुए विवाद इतना बढ़ा की हाथापाई की स्थिति आ गई। वहां मौजूद लोगों ने मामला सुलझाया। इधर पुजारी प्रतिनिधि प्रशांत शर्मा ने बताया कि मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर महेश पुजारी आए दिन पेपरबाजी करते हैं। दर्शनार्थियों को भी परेशान करते हैं। कई ऐसे विवाद है जो इनके द्वारा शुरू किए गए और खामियाजां अन्य पुजारियों को भी भुगतना पड़ता है। महेश पुजारी ने तीन दिन पहले पुजारी प्रदीप गुरु से भी गर्भगृह में पूजन कराने के दौरान बहस की थी। इसी बात पर गुदरी चौराहे पर बातचीत हो रही थी। यह विवाद कलेक्टर आशीष सिंह तक भी पहुंचा। कलेक्टर का कहना है कि पुजारी और पुजारी प्रतिनिधि को बैठाकर समझाया जाएगा। दोनों ही महाकाल से जुड़े है। श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिष्ठा का भी सवाल है। कोई ऐसा कार्य नहीं होना चाहिए जिससे मंदिर की प्रतिष्ठा को धूमिल हो।

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