क्या चिंतन से सत्ता में उदय कर पाएगी कांग्रेस..? एक परिवार-एक टिकट से सॉफ्ट हिंदुत्व तक; सोनिया ने कहा- पार्टी ने आपको बहुत कुछ दिया, अब कर्ज उतारने का समय

22 राज्यों की विधानसभा और 2 लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद उदयपुर में कांग्रेस पार्टी का चिंतन जारी है। यह पहला मौका नहीं है, जब कांग्रेस चिंतन शिविर का आयोजन कर रही है। सोनिया गांधी के रहते कांग्रेसियों के लिए चौथी बार चिंतन के लिए शिविर लगाया गया है। शिविर में वन फैमिली, वन टिकट का फॉर्मूला लागू करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों का टर्म भी फिक्स्ड किया जाएगा। अनुशासन को लेकर भी सख्त फैसले लिए जाएंगे।
वेलकम स्पीच में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा- पार्टी ने हमें बहुत कुछ दिया है, अब कर्ज उतारने का समय है। सोनिया ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को त्याग करके पार्टी हित में काम करने की नसीहत दी है। कांग्रेस कार्यसमिति में कही गई बात को आज खुले में दोहराई है। कहा- ऐसा समय आया है कि हमें संगठन हितों के अधीन काम करना होगा। सबसे आग्रह है कि खुलकर अपने विचार रखें, मगर बाहर एक ही संदेश जाना चाहिए संगठन की मजूबती, मजबूत निश्चय और एकता का । सोनिया ने कहा- विफलताओं से हम बेखबर नहीं हैं। न हम बेखबर हैं संघर्ष और कठिनाइयों से जो हमें आगे करना है। लोगों की उम्मीदों से हम अनजान नहीं है। हमें यह प्रण लेने इकट्ठा हुए हैं, हम देश की राजनीति में अपनी पार्टी को उसी भूमिका में लाएंगे जो सदैव निभाई है, जिस भूमिका की उम्मीद इस बिगड़ते समय में देश की जनता करती है। हम आत्मनिरीक्षण कर रहे हैं। यह तय करें कि यहां से निकलें तो एक नए आत्मविश्वास और कमिटमेंट से प्रेरित होकर निकलेंगे।
सोनिया ने कहा- आज पार्टी के सामने असाधारण परिस्थितियां हैं। असाधारण परिस्थितियों का मुकाबला असाधारण तरीके से ही किया जा सकता है। हर संगठन को जीवित रहने बढ़ने के लिए भी अपने अंदर पैनापन लाना होता है। हमें सुधारों की सख्त जरूरत है। हमें रणनीतिक बदलाव, ढांचागत सुधार और रोजाना काम करने के तरीके में बदलाव सबसे बुनियादी जरूरी मुद्दा है। हमारा उत्थान सामूहिक प्रयासों से ही हो पाएगा। ये प्रयास आगे टाले नहीं जा सकते। न आगे जा सकते हैं, न टाले जा सकते हैं यह प्रभावशाली कदम होगा। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यूपीए सरकार के समय में लोग क्या कहेंगे इसका ध्यान रखा जाता था। आज ये लोग धर्म के नाम पर देश पर काबिज हो गए हैं। धर्म जाति ऐसी चीज है कि आप दंगे भड़का सकते हो। अब राजस्थान तो टारगेट में नंबर वन है। दंगाई का, सीबीआई, ईडी का छापा शुरू हो जाता हे। इनके लोग दूध के धुले हैं, इन पर कोई छापा नहीं पड़ता।
सोनिया की स्पीच के बाद उदयपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में अब एक ही सवाल तैर रहा है, क्या उदयपुर में शिविर लगाकर सत्ता में कांग्रेस उदय कर पाएगी? कांग्रेस के किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का पोस्टर लगाया गया है। दरअसल, 2004 में उनके निधन के बाद से यह पहला मौका है, जब पार्टी ने नरसिम्हा राव को फिर से जगह दी है। 2011 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में गांधी परिवार के करीबी मणिशंकर अय्यर ने दावा किया था कि बाबरी विध्वंस में राव की भूमिका के बाद पार्टी हाईकमान उनसे असहज महसूस कर रही थी। हालांकि, उनके पोस्टर लगाए जाने को कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर बढ़ते हुए देखा जा रहा है। राव अयोध्या में बाबरी विध्वंस के वक्त भारत के प्रधानमंत्री थे। पिछले कुछ सालों से इस स्ट्रैटजी पर राहुल गांधी भी बढ़ते दिख रहे हैं। राहुल अक्सर हिंदू और हिंदुत्व को लेकर बयान देते रहे हैं।
लगातार आंतरिक कलह से जूझ रहे गांधी परिवार को भी इस चिंतन शिविर से मजबूती मिल सकती है। चुनावों में हार की जिम्मेदारी को लेकर लगातार पार्टी में घमासान मचा हुआ है। वहीं शिविर में G-23 समेत कांग्रेस के सभी नेता एकजुट हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि शिविर के बाद फिर से गांधी परिवार कांग्रेस की सत्ता के केंद्र में रहेगा। शिविर में राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनाए जाने की भी मांग उठ सकती है। इसी साल कांग्रेस में नए अध्यक्ष का चुनाव होना है। कांग्रेस ने इस चिंतन शिविर का नाम नवसंकल्प दिया है। इसमें खेती-किसानी, रोजगार, राष्ट्रीय सुरक्षा, दलित-आदिवासियों पर अत्याचार रोकना समेत 6 मुद्दों पर प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए शिविर में कांग्रेसी संकल्प लेंगे।
नए मॉडल लागू होंगे
कांग्रेस में बदलाव के साथ सभी नए मॉडल भी लागू किए जाएंगे। टिकट डिस्ट्रीब्यूशन से लेकर पद पर लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले फॉर्मूला को बदलने की भी बात की जा रही है। इसके अलावा पार्टी में लगातार किसी को 5 साल के बाद पद नहीं दिया जाए, कम से कम 3 साल का कूलिंग पीरियड रहे। तीन साल के गैप के बाद ही आगे कोई पद दिया जाए। शुक्रवार सुबह ट्रेन से पहुंचे राहुल गांधी का राजस्थानी अंदाज में स्टेशन पर स्वागत हुआ। राहुल गांधी के साथ दिल्ली से कई बड़े नेता भी ट्रेन से ही आए। तीन दिन चलने वाले इस शिविर में देश की सबसे पुरानी पार्टी का भविष्य तय होगा। कांग्रेस से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यह शिविर अब तक हुए आम शिविरों की तरह नहीं है।  
4 होटल्स में स्टे, राहुल-प्रियंका के साथ पायलट भी ताज में
चिंतन शिविर के लिए 4 होटल्स ताज अरावली, अनंता रिसोर्ट, ऑरिका लेमन ट्री और रेडिसन ब्लू में नेताओं को रुकवाया गया है। राहुल, सोनिया और प्रियंका गांधी सहित तमाम वरिष्ठ नेता ताज अरावली में रुके हैं। सचिन पायलट भी ताज में ही रुके हैं।

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