अब राजगढ़ में सांप्रदायिक हिंसा, आगजनी और पथराव

राजस्थान की तरह मध्य प्रदेश में भी तनाव की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। खरगोन और सेंधवा के बाद अब राजगढ़ में हिंसा का मामला सामने आया है। उपद्रवियों ने कुछ घरों और दुकानों में आग लगा दी। विवाद की शुरुआत जमीन के मुद्दे पर हुई थी, जिसने हिंसा और आगजनी का रूप ले लिया। बीती रात दो समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए। पथराव और आगजनी के बाद पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि हालात नियंत्रण में है। घटना में पुलिसकर्मी समेत तीन लोग घायल हुए हैं। 
पुलिस का कहना है कि जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव करेड़ी में दो अलग-अलग समुदायों के लोगों के घर में आग लगाई गई थी। राजगढ़ थाना प्रभारी उमेश यादव ने उन घरों में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की, जिस पर पथराव हो गया। इस विवाद को लेकर कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। कुछ उपद्रवी कह रहे हैं कि यह आग बुझनी नहीं चाहिए। जो कुछ भी करना पड़े, करेंगे। हालांकि, कुछ ही घंटों में पुलिस ने उपद्रव पर काबू पा लिया। इस हिंसा में पुलिस समेत दोनों पक्षों के लोग घायल हुए हैं। वीडियो से साफ है कि दंगा भड़काने की साजिश थी। पुलिस जांच कर रही है। इससे पहले खरगोन और सेंधवा में रामनवमी के जुलूस पर पथराव के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। खरगोन में तो एक महीने बाद अब तक कर्फ्यू लगा हुआ है।  
गांव के दो पक्षों में जमीन विवाद था। बुधवार को एक पक्ष ने दूसरे को रोककर बात करनी चाही। बातों-बातों में कहासुनी हो गई। दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। विवाद बढ़ा तो एक पक्ष ने दूसरे के घर और दुकानों में आग लगा दी। पथराव भी हुआ। इसमें पुलिस के वाहन भी चपेट में आ गए। विवाद बढ़ने पर आईजी इरशद वली भी मौके पर पहुंच गए। एसपी प्रदीप शर्मा और कलेक्टर हर्ष दीक्षित समेत अन्य अधिकारी भी गांव में पहुंचे और लोगों को तितर-बितर करवाया। आठ थानों की पुलिस गांव में लगाई गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में फ्लैग मार्च निकाला। शांति समिति की बैठक करवाई गई है।  


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